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कम उम्र की महिलाएं बांझपन से हैं परेशान 0

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वाराणसी। वाराणसी आब्स्टेट्रिक और गायनकोलॉजी सोसाइटी (वोग्स) और आईएसपीएटी(प्रैनेटल डायग्नोसिस एंड थेरेपी की भारतीय सोसाइटी) के तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन में महिलाओं में बांझपन की समस्या और समाधान पर चिकित्सकों ने चर्चा की। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि बांझपन की समस्या से केवल बड़ी उम्र नहीं बल्कि कम उम्र की महिलाएं परेशान हैं। अस्पतालों में जाने वाली 20 से 25 साल की युवतियां भी इसकी चपेट में हैं। इनका समय से इलाज जरूरी है।
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नदेसर स्थित एक होटल में आयोजित सम्मेलन में बनारस, यूपी, दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक आदि जगहों से 200 से अधिक स्त्री रोग विशेषज्ञों ने मंथन किया। आईएसपीएटी की दिल्ली शाखा की सचिव डॉ. शिवानी गौस ने बताया कि लगभग 30 प्रतिशत महिलाएं जो बांझपन के साथ आती हैं, वे 20 से 25 साल की आयु के समूह में हैं। बताया कि बांझपन अब गतिहीन जीवन शैली और खान-पान पर विशेष ध्यान न देने की वजह से प्रभावित कर रहा है। बीएचयू स्त्री रोग विभाग की प्रोफेसर अनुराधा खन्ना ने इसके लिए महिलाओं में अंडों की गुणवत्ता खराब होने की समस्या बताई। कहा कि अस्पताल आने वाली महिलाओं में कम उम्र की महिलाएं अधिक रहती हैं। वोग्स की अध्यक्ष डॉ. अर्चना शाह और मुजफ्फरनगर ओब्स्टेट्रिक ग्नकोलॉजी सोसायटी अध्यक्ष डॉ. तेरीनी तनेजा ने भी इस पर विचार रखे। कार्यक्रम में डॉ. शिवानी,डॉ. सीमा पांडे आदि मौजूद रहे।
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