फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गंगा में गिर रहे 32 बड़े नाले

विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। एनजीटी के फैसले का काशी में गंगा निर्मलीकरण की दिशा में कितना अमल हो पाएगा, यह तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन अब तक सरकारी, गैर सरकारी स्तर पर किए गए प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं। नमामि गंगे परियोजना लागू होने से पहले गंगा के जो हालात थे, अब उससे भी बदतर हो गए हैं। गंगा को स्वच्छ बनाने की शुरुआत 31 साल पहले हुई और तब से अब तक करोड़ों रुपये बहा दिए गए लेकिन गंगा और मैली होती गई। योजनाएं एक के बाद एक लागू हुईं। केंद्र और प्रदेश सरकार के अलावा एनजीटी से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक ने समय-समय पर सख्ती की लेकिन इतना सबके बाद भी गंगा में न तो नालों का गिरना रुका और न ही अवैध निर्माण का सिलसिला।
विज्ञापन

काशी में गंगा निर्मलीकरण की शुरुआत 14 जून 1986 को राजेंद्र प्रसाद घाट से तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने की थी, मगर 31 साल बाद भी गंगा घरेलू, औद्योगिक नालों के प्रदूषण की मार झेल रही है। हालात ये हैं कि शहर से रोजाना निकलने वाले करीब 300 एमएलडी सीवेज में 200 एमएलडी सीवेज नालों के जरिए सीधे गंगा और वरुणा में बहाया जा रहा है। दीनापुर और गोइठहां में निर्माणाधीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अब तक अधूरा है। जब तक ये एसटीपी चालू नहीं होंगे तब तक नदियों में सीवर का गिरना बंद नहीं हो पाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें