वाराणसी। जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए अब वोटिंग 28 जुलाई को होगी। गौरतलब है कि पहले वोटिंग 15 जुलाई को होनी थी और इसे लेकर भाजपा व सपा में जबरदस्त खेमेबंदी थी। इसी बीच गुरुवार को शासन स्तर से निर्देश आया कि अब अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बाद वोटिंग 28 जुलाई को होगी। वहीं, भाजपा और सपा के नेता जिला पंचायत सदस्यों को अपने खेमे में करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। उधर, प्रशासन भी नजरें गड़ाया हुआ है कि वोटिंग को लेकर धनबल और बाहुबल का खेल न चलने पाए।
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर फिलहाल सपा की अपराजिता सोनकर का कब्जा है। तकरीबन डेढ़ साल पहले हुए चुनाव के दौरान अपराजिता के पक्ष में 48 में से 31 सदस्यों ने मतदान किया था। मगर, बीते मार्च में प्रदेश में सत्ता बदलते ही जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा। बीते 21 जून को भाजपा जिलाध्यक्ष और विधायक 28 पंचायत सदस्यों के साथ डीएम योगेश्वर राम मिश्र से मिले और अविश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए वोटिंग की मांग किए। डीएम ने इसके लिए 15 जुलाई की तिथि नियत की थी लेकिन गुरुवार को 28 जुलाई की तिथि वोटिंग के लिए निर्धारित कर दी गई। भाजपा नेताओं का दावा है कि सपा की स्थिति ठीक नहीं है और वोटिंग में सब कुछ सामने आ जाएगा। वहीं, सपा नेताओं का कहना है कि अपराजिता के विरोध में खड़े होने वाला प्रत्याशी वोटिंग में जीत नहीं पाएगा। उधर, वोटिंग की बढ़ाई गई तिथि को लेकर भाजपा और सपा नेता अलग-अलग निहितार्थ निकालते देखे गए। अर्दली बाजार स्थित कार्यालय पर हुई बैठक में सपा जिलाध्यक्ष डॉ. पीयूष यादव ने कहा कि जिला प्रशासन के शासन के दबाव में वोटिंग की तिथि आगे बढ़ाई है। अपराजिता सोनकर की जीत सुनिश्चित देख प्रदेश सरकार नियम और कानून की धज्जियां उड़ाकर जिला पंचायत की कुर्सी पर किसी भी तरह से कब्जा करना चाहती है। प्रदेश सरकार कितनी भी तारीख बदल ले लेकिन वोटिंग में जीत सिर्फ अपराजिता की ही होगी।