बलिया। 14 महीने से राशन कार्ड संशोधन का काम चल रहा है लेकिन पूर्ति विभाग के अधिकारी अंतिम रूप नहीं दे सके हैं। संशोधन की आड़ में हर महीने से अनाज का गोलमाल किया जा रहा है।
वर्ष 2016 के मार्च महीने में शासन की ओर से एनएफएसए (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम) लागू कर दिया गया। पूर्ति विभाग की ओर से की गई राशन कार्ड की फीडिंग के आधार पर आवंटन जारी किया गया और कार्डधारकों की सूची ऑनलाइन किया गया। इस सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी होने की शिकायत पर इसके संशोधन की प्रक्रिया शुरू की गई। हालत यह है कि संशोधन के नाम पर आए दिन कार्डधारकों के नाम व संख्या में बदलाव कर गड़बड़झाला किया जाता है और पूर्ति विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हर महीने अनाज का गोलमाल किया जाता है। बताया जाता है कि अधिकांश गांवों के कार्डधारकों की सूची में कई बिना नाम के भी हैं जो ऑनलाइन किया गया है। लेकिन बिना नाम वाले कार्ड संख्या पर यूूूूूनिट जरूर अंकित होता है। ऐसे बिना नाम वाले अनाज का गोलमाल पूर्ति विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से होता है।
उदाहरण के लिए सोहांव ब्लॉक के भरौली, सोहांव आदि गांवों की सूची को देखा जा सकता है। इसके अलावा कई गांवों में तो एक ही नाम के दो राशन कार्ड बनाए गए हैं लेकिन कार्डधारक को आजतक अनाज नसीब नहीं हुआ। एक कोटेदार दूसरे कोटेदार के यहां अनाज होने की बात कहकर टरकाते हैं और अधिकारियों से मिलीभगत से अनाज का गोलमाल करते हैं। यह गोरखधंधा र्कईं गांवों में किया जाता है। उदाहरण के लिए फेफना गांव के प्रह्लाद मिश्रा की पत्नी शोभा देवी के नाम से दो राशन कार्ड की फीडिंग कर गांव में स्थित दोनों कोटेदारों से एक-एक कार्ड संबद्ध किया गया है लेकिन कार्डधारक को अनाज का वितरण नहीं किया जाता है। श्री मिश्र ने दर्जनों बार अधिकारियों से शिकायत भी की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह तो बानगी भर है पूरे जिले में वितरण व्यवस्था ध्वस्त है और अनाज का गोरखधंधा बदस्तूर जारी है।
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राशन कार्ड सत्यापन का कार्य कराया जा रहा है और जल्द की संशोधन की प्रक्रिया को पूरी कर ली जाएगी। कोटेदारों की ओर से गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाती है। - विनय कुमार सिंह, डीएसओ, बलिया