तेज आंधी के साथ बारिश ने शुक्रवार की आधी रात शहर के इंतजामों को उड़ा दिया। छानी-छप्पर और टिन शेड उड़ गए तो जगह-जगह बिजली के खंभे और पेड़ धराशाई हो गए। इससे पूरे शहर की बिजली-पानी की आपूर्ति ठप हो गई। बिजली न आने से इंवर्टर और मोबाइल डिस्चार्ज हो गए। कई इलाकों में यातायात बाधित हो गया। इतना ही नहीं, राजघाट के पास तीन नावें गंगा में समा गईं। इसके चलते शनिवार को दिनभर लोग बिजली-पानी के लिए तरस गए। पंद्रह मिनट की आंधी से 15 घंटे की सांसत शहरवासियों ने झेली है। देर शाम बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल हो पाई।
रात करीब बारह बजे 70-80 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चली आंधी ने घरों के टिन शेड और छप्पर गोल कर दिए। गहरी नींद मेें सोए लोगों की आंखें दरवाजे, खिड़कियों के टकराने से खुल गई। अंधड़ के चलते छतों पर सोए लोग भाग कर नीचे आ गए। शहर के तिराहों, चौराहों पर लगीं विज्ञापनों की होर्डिंग, वीडीए, पर्यटन विभाग के साइन बोर्ड टूटने और पेड़ों के उखड़कर गिरने से यातायात बाधित हो गया। राजघाट के पास गंगा की लहरों में एक मोटरबोट और दो नावें समा गईं। नावों को निकालने के लिए मल्लाहों, गोताखोरों ने घंटों मशक्कत की।
पेड़ की डालियां टूटकर तारों पर गिरने और बिजली के खंभे उखड़ने से वरुणा पार, रामनगर के अलावा पांडेयपुर, सारनाथ, मंडुवाडीह, सिगरा, चितईपुर, लंका, भेलूपुर, मच्छोदरी, गोदौलिया, चेतगंज, लहुराबीर आदि इलाकों में बत्ती गुल हो गई। जंपर उड़ने से भी कई इलाकों में रात भर बिजली नहीं रही। सुबह से बिजली विभाग के कर्मचारियों ने अलग-अलग इलाकों में फाल्ट खोजकर मरम्मत करने में जुट गए।
बेमौसम तेज आंधी और बारिश सब्जियों की खेती लिए फायदेमंद है लेकिन आम की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। कृषि विज्ञान संस्थान केनिदेशक प्रोफेसर आरपी सिंह का कहना है कि बारिश से तकरीबन 25 फीसदी आम की फसल बर्बाद हुई है। इस तरह मौसम में बदलाव होता रहा और तेज आंधी और बारिश हुई तो बची फसल भी चौपट हो जाएगी। उन्होंने बताया कि आम को छोड़कर बारिश से सब्जियों और जायद की फसलों को फायदा है। खीरा, ककड़ी, परवल, भिंडी, खरबूज, तरबूज जल्दी तैयार होगा और उत्पादन बढ़ने से इसकी कीमत में भी कमी आएगी।