वाराणसी। अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही भीम आर्मी लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल के जरिए दलित सियासत में उभरना चाहती है। दलितों की रहनुमाई करने वाली बसपा ने भीम आर्मी और चंद्रशेखर से किनारा कर लिया है। कांग्रेस और भाजपा में वे जा नहीं सकते, ऐसे में प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में रोड शो व उनकी मुखालफत कर चंद्रशेखर खुद को राजनीति में स्थापित करना चाहते हैं।
पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल और देश के अन्य हिस्सों में व्यापक तो नहीं, मगर भीम आर्मी का जनाधार है। बनारस के रोड शो के जरिए चंद्रशेखर संकेत देना चाहते हैं कि दलित समाज की नई पीढ़ी उनके साथ है। रैदासियों के तीर्थ संत रविदास मंदिर में दर्शन पूजन के बहाने पंजाब में भी अपने संगठन को धार देने की कवायद है।
सहारनपुर जातीय संघर्ष के मुख्य आरोपी चंद्रशेखर बसपा से जुड़ाव का दावा करते रहे हैं, मगर बसपा सुप्रीमो मायावती ने भीम आर्मी और चंद्रशेखर को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ऐसे में वजूद की लड़ाई के अलावा भीम आर्मी के पास कोई चारा नहीं है। यही कारण है कि वह प्रधानमंत्री की मुखालफत के जरिए राजनीतिक छवि बनाना चाहते हैं।
रविदास मंदिर में श्रद्धालुओं से जनसंपर्क
संत रविदास मंदिर में दर्शन के बाद मौजूद रैदासियों के बीच चंद्रशेखर ने अपने और संगठन के बारे में बताया। संगठन के काम काज को पंजाब में बताने की अपील कर और खुद को कांशीराम का बेटा बताकर उनसे जुड़ने का प्रयास किया। उधर, दर्शन पूजन के बाद चंद्रशेखर के राजनीतिक बयान और अन्य गतिविधियों पर मंदिर प्रबंधन से अफसोस जताया। मैनेजर ज्ञान चंद ने कहा कि रविदास मंदिर में आने वाले सभी लोगों का समान अधिकार है, लेकिन किसी को यहां राजनीति के मुद्दे पर बात करने का अधिकार नहीं है। यह एक बहुत दुखद बात रहा कि पढ़े लिखे होने के बाद भी मंदिर में राजनीति की बातें की गईं। हम लोगों का किसी भी पार्टी और संगठन से कोई लेना देना नहीं है।