सोनभद्र। अफसरों के निवास के समीप दिनदहाड़े प्रधानाचार्य की हत्या से शिक्षकों के साथ आम लोगों में भी रोष है। वारदात के बाद सपा और शिक्षक नेताओं के साथ लोग सड़क पर उतरे और जमकर नारेबाजी की। जिला अस्पताल के बाहर वाराणसी शक्तिनगर मार्ग पर जाम लगा दिया।
एएसपी, एसडीएम और सीओ ने उन्हें समझाया, लेकिन वह हटने को तैयार नहीं हुए। बाद में एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह हत्यारोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन देने के साथ ही एमएलसी चेतनारायण से वार्ता कर जाम को समाप्त कराया। उधर, माध्यमिक शिक्षक संघ, प्रबंधक महासभा, वित्तविहीन शिक्षक संघ ने घटना के खुलासे को लेकर पुलिस को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। हत्याकांड के जल्द खुलासे की मांग करते हुए शिक्षकों ने पुलिस को चेतावनी दी है कि जल्द हत्यारे गिरफ्तार नहीं हुए तो वह आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। शोक और विरोध स्वरूप जिले के सभी माध्यमिक विद्यालय बंद रखे गए। शिक्षक इस पूरे मामले को लेकर सोमवार को रणनीति बनाएंगे जाएगी। एसपी ने एएसपी ओपी सिंह की अगुवाई में सिटी सीओ अभिषेक सिंह, स्वाट टीम प्रभारी एवं कोतवाल को हत्यारों को पकड़ने की जिम्मेदारी सौंपी है। पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए राबर्ट्सगंज के हर्ष नगर, उरमौरा समेत अन्य गांवों में छापेमारी की। पुलिस एक युवक को हिरासत मेें लेकर पूछताछ कर रही है।
दो गोली फंसी, तीन चीरते हुए निकलीं
सोनभद्र। बदमाशों ने डॉ. सुरेश यादव को पांच गोली मारीं। तीन गोली शरीर को चीरते हुए बाहर निकल गईं, जबकि दो गोली शरीर में फंसी रहीं। पुलिस के मुताबिक, बदमाशों ने किस असलहे से गोली मारी थी, इसका स्पष्ट पता नहीं चल सका है। संभावना जताई जा रही है कि नाइन एमएम के पिस्टल से गोली मारी गई है। बदमाशों के पास दो असलहे थे। भागने के दौरान एक असलहा और कारतूस छूट गया।
उलझी हत्या की गुत्थी
डॉ. सुरेश को हाल ही में आरएसएस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बिठाने के लिए लोकसभा समन्वयक की जिम्मेदारी दी गई थी। तर्क यह था कि डॉ. सुरेश न सिर्फ मृदुभाषी और नाराज लोगों को जोड़ना जानते हैं। आसपास के लोग अनसुलझे मामलों में उन्हें पंचायत के लिए बुलाते थे। ऐसे में हत्या की वजह को लेकर मामला और उलझ गया है।
साथी रहते साथ तो शायद न होती घटना
डॉ. सुरेश प्रतिदिन चार से साढ़े चार बजे के बीच चार से पांच मित्रों के साथ मार्निंग वाक पर जाते थे। शनिवार को ऐसा संयोग बना कि उनके साथ कोई नहीं था। घर पर रहने वाला ममेरा भाई वीरेंद्र बेठगांव स्थित खेत पर गया हुआ था। इस कारण शनिवार सुबह वह खुद घर के काम में व्यस्त हो गए, जिसके चलते निकलने में देर हो गई। वहीं,छपका के रहने वाले मुन्ना ने बताया कि गोली की आवाज सुनकर वह जब घटनास्थल पर पहुंचा तो प्रधानाचार्य खून से लथपथ थे। वह भागकर सड़क के उस पार रह रहे डॉ. राजकुमार के पास गया। राजकुमार ने नब्ज देकर मृत घोषित कर दिया। डॉ. राजकुमार ने प्रधानाचार्य के घर वालों को घटना की जानकारी दी।
...तो रेकी के बाद उतारा मौत के घाट
घटना के वक्त हाईवे से गुजरने वाले एक प्रत्यक्षदर्शी की माने तो प्रधानाचार्य डॉ. सुरेश अपने घर की तरफ से आए और पावर हाउस के पास स्थित मंदिर के सामने रोजाना की तरह सिर झुकाकर प्रणाम कर आगे बढ़े। उस समय वहां दो गोरे रंग के लंबे युवक खड़े थे। एक की कद काठी दूसरे से मजबूत थी। चेहरे पर दाढ़ी थी। चश्मा पहने हुए था। उन दोनों के हाव-भाग ठीक नहीं लग रहे थे। कुछ देर बाद उसे पता चला कि हत्या हो गई है। एसपी को पूछताछ में एक युवक ने बताया कि दो दिन पूर्व डॉ. सुरेश ने कहा था कि लगता है कि मुझे भी लाइसेंसी असलहा अपने पास रखना पड़ेगा। इससे यह साबित होता है कि उन्हें खतरा है।