वाराणसी। मुक्ताकाशीय मंच और शास्त्रीय संगीत की महफिल को सुधि श्रोताओं ने संगीत की बैठक में दम साधे सुना। तीन घंटे की सांस्कृतिक प्रस्तुति के दौरान श्रोता और कलाकारों के बीच मूक संवाद हर किसी ने महसूस किया। पं. उदय भावलकर के ध्रुपद में धमार और आलाप की हर प्रस्तुति श्रोताओं के दिलों में उतरती चली गई। सरोद वादक देवज्योति बोस की पखावज और तबले पर प्रस्तुति ने तो श्रोताओं को सम्मोहन में बांध लिया। सरोद पर पिता देवज्योति बोस और तबले पर पुत्र रोहन बोस की जुगलबंदी को तो दर्शक भी अपलक निहारते रह गए।
शनिवार को लीजेंड्स ऑफ इंडिया, कला प्रकाश और अमर उजाला की ओर से आयोजित संगीत की बैठक नगवां स्थित लिटिल फ्लावर हाउस के एंफीथिएटर मैदान पर हुई। कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति ध्रुपद गायक पं. उदय भावलकर ने राग केदार में आलाप से की। दूसरी प्रस्तुति राग देश में धमार चोरी-चोरी मारत कुमकुम... की प्रस्तुति की। ध्रुपद गायन, पखावज और तानपुरे की संगत ने हर श्रोता को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके उपरांत राग देश में आलाप और राग बहार में कन्हैया ने सब सखियन के संग अति धूम मचाई... पेश किया। समापन उन्होंने सघन वन फूली सरसों... पेश कर बासंती बयार का अहसास कराया। उसके बाद दर्शकों से भरा मुक्ताकाशीय मंच तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। पखावज पर सुखद मुंडे, तानपुरे पर मीवा और सियाराम ने संगत की।
बैठक की दूसरी प्रस्तुति को सरोदवादक देवज्योति बोस और उनके पुत्र रोहन ने यादगार बना दिया। राग श्याम में ध्रुपद की बंदिश आज ब्रज में होरी खेलत... पेश कर फागुन के रंगों को सुरों के माध्यम से बिखेरा। पखावज पर सुखद मुंडे ने बेहतरीन संगत की। बैठक को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपने गुरु अमजद अली खान की बंदिश द्रुत तीन ताल में पेश की। पखावज और तबले की संगत ने तो सरोद के सुरों को चार चांद लगा दिया। अंत में उन्होंने दर्शकों की फरमाइश पर कई बंदिशों को सरोद के तारों पर छेड़ा।
इसके पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत लिटिल फ्लावर हाउस के नलिन गुलाटी, लीजेंड्स आफ इंडिया के दीपायन मजूमदार और कला प्रकाश के गौरव कपूर ने दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शुभ्रा वर्मा ने किया। इस दौरान प्रो. ऋत्विक सान्याल, अनुराधा रातूरी, भावना सिन्हा, अजीत श्रीवास्तव, शिवो आलिम, विजय शंकर मिश्रा, अमरनाथ त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।