वाराणसी। शास्त्रीय संगीत की अनमोल विरासत के प्रति जागरूकता और रुचि बढ़ाने और संभावनाशील युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए बैठक की परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है। देश की सांस्कृतिक राजधानी में संगीत की बैठक परंपरा का अपना अलग इतिहास रहा है।
इसी शृंखला को आगे बढ़ाते हुए लीजेंड्स ऑफ इंडिया की ओर से सांस्कृतिक संगीत की संध्या बैठक का आयोजन नौ मार्च को किया जा रहा है। नगवां स्थित लिटिल फ्लावर स्कूल के एंफीथिएटर में आयोजित संगीत की बैठक में ध्रुपद गायक पं. उदय भावलकर और सरोद वादक पं. देवज्योति बोस की युगल बंदी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र होगी। कार्यक्रम का मीडिया पार्टनर अमर उजाला है।
भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया के सितारे पं. उदय भावलकर कम उम्र से ही अपनी गायन प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। देश और विदेश के विभिन्न समारोहों में आयोजित संगीत समारोहों में वह अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। इसके अलावा वह बॉलीवुड की कई फिल्मों में भी अपनी संगीत की प्रतिभा दिखा चुके हैं। बतौर अध्यापक वह विश्व के कई संगीत विश्वविद्यालय में शिष्यों को ध्रुपद की शिक्षा देते रहते हैं। कोलकाता में जन्मे सरोद वादक पं. देवज्योति बोस ने संगीत की शिक्षा बहुत कम उम्र से ही शुरू कर दी थी। उस्ताद अमजद अली खां के शिष्यों में शुमार पं. बोस ने अपने सरोद की ख्याति देश और विदेश में फैलाई है। उन्होंने पं. राजन-साजन मिश्र से भी संगीत का निर्देशन लिया है।