वाराणसी। प्रदेश सरकार छुट्टा पशुओं के चलते होने वाली समस्याओं को देखते हुए आश्रय स्थल बनाने का निर्देश दिया है, लेकिन यहां सुविधाओं की कमी के चलते स्थिति में बहुत बदलाव नहीं हो सका है। शहर में जगह-जगह आवारा पशु भटक रहे हैं। नगर निगम की ओर से दावा तो किया जा रहा है कि घाट से लेकर शहर की गलियों तक आवारा और छुट्टा पशुओं के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है लेकिन हकीकत कुछ और ही है। पशुओं को रखने के लिए कान्हा उपवन, कैटल कालोनी, गोशाला और कांजी हाउस की योजनाएं चल रही हैं।
गोदौलिया चौराहे से लेकर दशाश्वमेध घाट तक जगह-जगह छुट्टा पशु देखने को मिल जाएंगे। इसके अलावा शहर की सड़कों और गलियों में भी आए दिन छुट्टा पशुओं के कारण हादसे हो रहे हैं। पशुओं को शहर से हटाकर रखने के लिए बनने वाला कान्हा उपवन भी अभी प्रक्रिया में है। स्मार्ट प्रोजेक्ट के तहत गंगा किनारे करसड़ा के छितौनी गांव में बने रहे इस उपवन में 450 पशुओं के लिए कुल छह सेट तैयार कराने है। अभी इसमें 225 पशुओं को एंट्री दी जा सकती है।
अधिकारियों की मानें तो कान्हा उपवन बनाने को लेकर तेजी से काम किया जा रहा है। उपवन का आधे से ज्यादा काम हो चुका है। फरवरी अंत तक सभी सेट बनकर तैयार हो जाएंगे। लेकिन नगर निगम ने अब तक यहां न कर्मचारियों की व्यवस्था की है और न ही जानवरों के खाने- पीने की। बनारस को स्मार्ट सिटी की लिस्ट में शामिल किए जाने के बाद वाराणसी स्मार्ट सिटी लिमिटेड (वीएससीएल) बनाया गया था। जिसके जरिये इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कराया गया है।