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टमाटर, आलू को नुकसान, अरहर-मटर भी चपेट में

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चौबेपुर। घने कोहरे व गलन से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नहरों मे पानी की किल्लत से जूझ रहे किसान अब पाले की मार से बेहाल हैं। कोहरे के कारण जनजीवन के साथ ही फसलों की रंगत भी फीकी पड़ने लगी है। जहां एक ओर टमाटर, आलू को ज्यादा नुकसान पहुंचा है। वहीं दूसरी ओर सरसो, अरहर, चना मटर जैसी फसलें भी ठंड की चपेट मे आ चुकी हैं। किसान फसलों की पैदावार को लेकर काफी चिंतित हैं।
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कृषि विशेषज्ञों की माने तो गेहूं की फसल को छोड़ कर रबी की लगभग सभी फसलों को मौसम की मार पड़ रही है। दलहनी फसलों मटर, चना, अरहर आदि के फूल गिरने की वजह से फलियों के न बनने की आशंका से किसान ज्यादा चिंतित हैं। क्षेत्र के सोनबरसा, मुरीदपुर, झाँझूपुर, बर्थराकलॉ, भगतुआँ, ब्यासपुर, कादीपुर, गिरधरपुर, धौरहरा, मुनारी, अजांव, भगवतीपुर, बर्थराखुर्द, गरथौली सहित दर्जनों गावों मे बोई गई आलू व टमाटर की फसलें झुलसा रोग की चपेट में हैं।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी सुभाष मौर्या ने बताया कि आलू की फसल को झुलसा रोग से बचाने के लिए मैन्कोजेब (डाईथेन एम-45) या जिनेब (डाईथेन जेड -78) नामक दवा में से किसी एक दवा की दो से तीन ग्राम दवा प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर सुबह या शाम के समय फसल पर छिड़काव करना चाहिए। कृषि विशेषज्ञ देवमणि त्रिपाठी ने बताया कि आलू व टमाटर की फसल को पाले से बचाने के लिए शाम के समय हल्की सिंचाई करनी चाहिए। खेतो की मेड़ों पर धुआं करने से भी फसल को पाले से बचाया जा सकता है।
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इस संबंध में उप कृषि निदेशक डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि आलू व टमाटर मे झुलसा रोग एक प्रकार का फफूँद जनित रोग है और अनुकूल मौसम मिलते ही यह रोग फैलने लगता है। मौसम खराब होने व बूदाबादी होने पर यह रोग बहुत ही तेजी फैलता है। इसके बचाव के लिए किसान को फफूँद नाशी दवा का छिड़काव करना चाहिए।
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