वाराणसी। नगर निकाय चुनाव के मद्देनजर शुक्रवार की शाम पांच बजे के बाद सार्वजनिक तरीके से या समूह बनाकर प्रचार पर रोक लगाई गई थी मगर सोशल मीडिया इस सरकारी फरमान से अछूता रहा। वाट्सएप ग्रुपों पर प्रत्याशियों के समर्थन में शनिवार देर तक माहौल बनाया जाता रहा। वहीं, फेसबुक पर भी महापौर और पार्षद प्रत्याशियों के समर्थन में संदेशों का जबरदस्त तरीके से आदान-प्रदान कर वोट मांगा गया। आचार संहिता के इस खुलेआम उल्लंघन के खिलाफ पुलिस कोई ठोस कार्रवाई करती नहीं दिखी।
आदर्श आचार संहिता के तहत शुक्रवार शाम पांच बजे के बाद चुनावी शोर थम गया था। मगर, सोशल मीडिया पर निर्वाचन आयोग के इस आदेश और पुलिस-प्रशासन की सख्ती का कोई खास असर नहीं दिखा। वाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर सहित सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों की मदद से महापौर और पार्षद प्रत्याशियों के समर्थक अपने पक्ष में जमकर माहौल बनाते हुए वोट मांगते दिखे। इसके साथ ही एक-दूसरे के प्रत्याशी पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी सोशल मीडिया पर चला। इस दौरान कुछेक अति उत्साही समर्थक अपने प्रत्याशी के समर्थन में जाति और धर्म की भी दुहाई देते देखे गए। बल्क मैसेज और कॉल के माध्यम से भी वोट देने की अपील की गई। यह मैसेज और कॉल पुलिसकर्मियों के पास भी आई लेकिन किसी ने कार्रवाई की जहमत नहीं उठाई।
इस संबंध में एसएसपी राम कृष्ण भारद्वाज ने बताया कि क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने 17 ह्वाट्सग्रुप चिह्नित किए हैं। इन पर शुक्रवार शाम पांच बजे के बाद चुनाव प्रचार हुआ है। ऐसे ही अन्य वाट्सग्रुप और फेसबुक पेज को चिह्नित कर सूचीबद्ध किया जा रहा है। सभी ग्रुप और पेज के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन का मुकदमा साइबर सेल की ओर से दर्ज कराया जाएगा।