स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से शुरू की गई है। इसमें स्कूलों की स्वच्छता, हरित प्रथाओं और पर्यावरणीय स्थिरता के आधार पर रेटिंग की जाती है। इन मानकों पर जिले के 126 विद्यालयों को पांच स्टार रेटिंग दी गई है। इसमें सबसे अधिक अंक शौचालय के लिए मिले हैं।
जिले में पहले चरण में 2944 स्कूलों ने 60 मानकों पर स्वच्छ हरित विद्यालय रेटिंग के लिए ऑनलाइन स्व-मूल्यांकन किया था। इस मूल्यांकन के आधार पर जिला और ब्लॉक स्तर पर अब भौतिक सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए जिला स्तर पर 10 सदस्यीय समिति गठित की गई है। ब्लॉक स्तर पर एआरपी की तरफ से 20-20 स्कूलों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्कूलों का राज्य स्तरीय मूल्यांकन के लिए चुनाव किया जाएगा। इसमें पांच रेटिंग वाले 126, चार रेटिंग वाले 1315, तीन रेटिंग वाले 1322, दो रेटिंग वाले 124 और एक रेटिंग वाले 57 विद्यालय हैं।
दूसरे चरण में मूल्यांकन में जिलाधिकारी की तरफ से गठित दस सदस्यीय टीम में जिलाधिकारी या जिलाधिकारी की ओर से नामित अधिकारी अध्यक्ष, जिला विद्यालय निरीक्षक सदस्य और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सदस्य-सचिव होंगे। इसके अलावा पंचायती राज विभाग, स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस के सक्षम अधिकारी के अलावा जिला स्तरीय एनजीओ और सामाजिक संगठनों के दो प्रतिनिधि सदस्य होंगे। मूल्यांकन में कई प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा इनमें स्वच्छता में विद्यालय परिसर और कक्षाओं की सफाई, हाथ धोने की व्यवस्था और व्यक्तिगत स्वच्छता की आदतें (जैसे बच्चों की साफ-सफाई), जल संरक्षण में वर्षा जल संचयन, पानी का फिर से इस्तेमाल और जल की उपलब्धता एवं गुणवत्ता की जांच की जाएगी। इसके अलावा शौचालय की कार्यक्षमता और दिव्यांग-अनुकूल सुविधाएं, कचरा प्रबंधन में ठोस कचरे का उचित निपटान और प्रबंधन, हरियाली और पर्यावरण में स्कूल में हरियाली का रखरखाव, ईको-क्लब और अन्य हरित पहल को बढ़ावा देना आदि शामिल है। बीएसए अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि इस मूल्यांकन के बाद सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।