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भगवान गणेश सिखाते हैं जीवन जीने का सलीका

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वाराणसी। भगवान गणेश संसार के सबसे बड़े शिक्षक हैं। गणपति ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जिनका हर स्वरूप कोई शिक्षा देता है, जीवन जीने का सलीका सिखाता है। भगवान गणेश बुद्धि के देवता हैं। वे जीवन को व्यवस्थित तरीके से जीना सिखाते हैं। उनके जीवन से हमें बहुत सी शिक्षाएं मिलती हैं जो जीवन में बेहद उपयोगी हैं। उक्त बातें सोमवार को नाटी इमली शिवाला में चल रही शिवपुराण कथा के दौरान आचार्य रवींद्र भारद्वाज ने कहीं।
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उन्होंने कहा कि भगवान गणेश का बड़ा सिर बड़े दिमाग का संकेत करता है। मैनेजमेंट का पहला सूत्र यही है कि आपकी सोचने, याद रखने और बातों को रखने के लिए बड़ी बुद्धि की आवश्यकता होती है। हमेसा अपना दिमाग खुला और विस्तृत रखें। संकीर्ण या छोटी सोच से जीत नहीं मिल सकती है। गणपति की बड़ी और झुकी आंखें इशारा करती हैं हमारे दृष्टिकोण की ओर। हाथी की आंखों की बनावट इस तरह की होती है कि उसे हर चीज खुद के बराबर नजर आती है। हम किसी को छोटा या कम नहीं आंके। हर इंसान की अपनी खूबी और महत्व होता है। सूंड या लंबी नाक हमारी दूरदर्शिता की ओर इंगित करती है। बड़े कान कहते हैं अपने से जुड़े हर व्यक्ति की बात सुनिए। बड़ा पेट संकेत है कि आप अपनी बातों को, योजनाओं को, महत्वपूर्ण और गुप्त मुद्दों को कितना पचा पाते हैं। गणपति कहते हैं कि अगर आप को सफल टीम लीडर बनना है तो आप अपनी बातों को गुप्त रखना सीखें। गणपति का वाहन चूहा है। हाथी जैसे शरीर चूहे पर कैसे बैठ सकता है, यह अजीब लगता है लेकिन यह सच है। गणपति बुद्धि के देवता है, बुद्धि कितनी भी बड़ी हो लेकिन उसे चलाने के लिए तर्क का सहारा चाहिए। चूहा तर्क का प्रतीक है। भगवान गणपति की दो पत्नियां हैं रिद्धि और सिद्धि। रिद्धि का अर्थ है हमारी कार्यकुशलता को सहेज कर रखना। सिद्धि का अर्थ है कार्यकुशलता। गणपति के दो पुत्र हैं योग और क्षेम। योग का अर्थ होता है जोड़। जिसका अर्थ आर्थिक लाभ से लगाया जाता है। बुद्धि हो तो कार्यकुशलता और कार्यकशलता हो तो आर्थिक लाभ मिलता है। क्षेम का अर्थ है जो भी आर्थिक लाभ है वह सुरक्षित रहे।
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