औराई। क्षेत्र के नटवां औरंगाबाद में तंबू लगा कर संचालित हो रहे आश्रम में रविवार को औराई पुलिस ने छापा मारकर जौनपुर की एक किशोरी को मुक्त कराया। मेडिकल मुआयना कराने के बाद किशोरी को उसके परिवारीजनों को सौंप दिया गया। साथ ही आश्रम संचालक कथित संत के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। कार्रवाई से आश्रम समेत आसपास के इलाके में खलबली मच गई। आश्रम में 50 से अधिक युवक-युवतियां मौजूद हैं।
मिर्जापुर के विंध्याचल निवासी राजेंद्र प्रसाद औराई क्षेत्र के नटवां औरंगाबाद गांव के बाहर टेंट लगाकर आश्रम चलाते हैं। बताया जाता है कि खुद को संत कहने वाले राजेंद्र प्रसाद समता मूलक समाज की स्थापना के लिए युवाओं के माध्यम से गांव-गांव अंबेडकर के विचारों का प्रचार-प्रसार कराते हैं। इसके लिए उसने आश्रम में बड़ी संख्या में युवक और युवतियों को रखा है, जिन्हें दो से तीन हजार मानदेय देता है। रविवार को जौनपुर के सुरेरी निवासी राम विलास यादव ने औराई थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया कि उनकी भांजी को बहला फुसला कर कथित संत अपने आश्रम में रखे हुए है। तहरीर मिलने के औराई एसओ सुनील दत्त दुबे फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस को देख वहां मौजूद राजेंद्र प्रसाद और युवक-युवतियां लामबंद हो गईं। हल्के विरोध के बाद पुलिस किशोरी को मुक्त करा कर अस्पताल ले गई। वहां मेडिकल कराने के बाद उसे परिवार वालों के हवाले कर दिया गया। साथ ही आश्रम संचालक राजेंद्र प्रसाद, उसके बेटे सूरज कुमार, मनीष कुमार, राम आसरे और रूबी बानो के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। औराई सीओ पवन कुमार ने कहा कि मामले की छानबीन की जा रही है। वहीं, अपने समर्थकों के साथ राजेंद्र प्रसाद भी थाने पहुंच गए। उनका कहना था कि अंबेडकर के विचारों को गांव-गांव पहुंचाना और बेरोजगार युवक-युवतियों को रोजगार देना उनका मकसद है।