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धन कुबेर संग धरती पर पधारेंगी महालक्ष्मी

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वाराणसी। धन कुबेर को लेकर महालक्ष्मी धन त्रयोदशी यानी धनतेरस को धरती पर पधारेंगी। महालक्ष्मी के आगमन पर काशी दीपमालाओं, फूलों, गेंदा-गुलाब के हारों से सजेगी। आयुर्वेद के जनक भगवान धनवंतरि भी इसी शुभ तिथि को समुद्र मंथन के दौरान निकले थे। काशी में धनवंतरि का वास रहा है। यहां धनवंतरि जयंती पर झांकियां सजेंगी और निरोगी काया के लिए जतन किए जाएंगे। 19 को ज्योति पर्व पर काशी का हर कोना दीपों से दमक उठेगा।
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धन त्रयोदशी सोमवार को 16 अक्तूबर की रात 12:47 बजे ही लग जाएगी। 17 अक्तूबर की रात 11:55 बजे तक धनतेरस के महामुहूर्त में धनवर्षा के योग हैं। महालक्ष्मी के आगमन पर व्यापारिक प्रतिष्ठानों के अलावा घर-आंगन को फूलों-रंगोलियों से सजाया जाएगा। लक्ष्मीभिलाषी आस्थावान महालक्ष्मी को स्थिर रखने के लिए सविधि मंत्रोच्चार के साथ पूजा करेंगे।
धनतेसर पर बाजार की रंगत अलग छटा बिखेरेगी। इसके लिए अभी से शहर नए रूप-रंग में रचने -बसने लगा है। जगह-जगह स्वागत द्वार, वंदनवार बनाए गए हैं। भवनों, ऊंची इमारतें रंग-बिरंगी लतरों से सजाई जाने लगी हैं। धनतेरस पर स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के कपाट खोले जाएंगे। बाबा विश्वनाथ के मंदिर से लगे इस दरबार में स्वर्णिम अन्नपूर्णा के दर्शन वर्ष में सिर्फ एक बार धनतेरस पर ही होते हैं। उस दिन मां के ऐश्वर्य स्वरूप के दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु उमड़ेंगे। इसी के साथ चार दिन तक स्वर्णमयी अन्नपूर्णा का दरबार आम भक्तों के लिए खुला रहेगा। सिक्का और लावा के रूप में अन्न-धन का खजाना महंत रामेश्वरपुरी महाराज श्रद्धालुओं को वितरित करेंगे।
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धनतेरस पर महालक्ष्मी पूजन का मुहूर्त
स्थिर कुंभ लग्न में दिन में 2:25 से 3:56 तक
स्थिर वृष लग्न में शाम 7:03 से रात 9.00 बजे तक।
इसके अलावा रात 11: 55 बजे तक सोना, चांदी, हीरा, पन्ना, भूमि, भवन, वाहनों के अलावा मन पसंद धातुओं की खरीद की जा सकेगी।
हनुमान जंयती 18 को, रोग हरण के होंगे जतन
हनुमान जयंती 18 अक्तूबर को मनाई जाएगी। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी भी मनाई जाएगी। इसी रात हनुमान जी का अवतरण हुआ था। शाम को नरक यातना से बचने के लिए चार बत्तियों वाला दीपक घर के बाहर दक्षिणाभिमुख जलाया जाएगा। चंद्रोदय के समय तिल के तेल से स्नान करने से रोग हरण होता है।
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