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संस्कृति-संस्कार की नई सुबह

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संस्कृति-संस्कार की नई सुबह
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वाराणसी। देव कन्याओं के कंठ से वेद ऋचाएं गूंजीं और घंटे-घड़ियाल के साथ पुरोहितों ने पतितपावनी गंगा की आरती उतारी। एक ओर साधु-संतों, बटुकों की मौजूदगी में विश्व शांति की कामना से यज्ञ-हवन तो दूसरी ओर निरोगी काया के लिए योगाभ्यास। साथ में सितार के तारों पर प्रभाती राग नट भैरव की अवतारणा। संस्कृति-संस्कार के ऐसे ही मनोहारी दृश्यों-भावों को समेटे अस्सी घाट पर रविवार की सुबह हुई। मौका था सुबह-ए-बनारस की प्रभाती रागों की महफिल के अनवरत बिना किसी दोहराव के 1001 दिन पूरे करने का।
काशी की संस्कृति से देश-दुनिया को परिचित कराने को सजाया गया अनूठा गुलदस्ता रविवार की सुबह पौ फटने के साथ ही खास अंदाज में निखर उठा। संगीत, कला, साहित्य जगत की हस्तियों से लेकर मंत्री-अफसर तक इस मौके को यादगार बनाने भोर में ही अस्सी घाट पहुंचे। सबसे पहले पाणिनी कन्या महाविद्यालय की देव कन्याओं ने वेद पाठ आरंभ किया और पुरोहितों ने गंगा की महाआरती की। सुमेरु पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती और महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा के अलावा संन्यासियों ने घाट पर यज्ञ किया। डीएम योगेश्वर राम मिश्र, आईजी दीपक रतन ने भी आहुति दी।
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इसके बाद सुबह-ए-बनारस की महफिल सजी। बीएचयू संगीत एवं मंच कला संकाय वाद्य विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश शाह ने सितार पर विलंबित तीन ताल में राग नट भैरव की अवतारणा की। तबले पर संगत की ललित कुमार ने। इस मौके पर ठुमरी गायिका पद्मश्री सोमा घोष, सीडीओ सुनील वर्मा, डिवीजनल कमांडेंट होमगार्ड रामकृष्ण वर्मा, सुबह-ए-बनारस के अध्यक्ष प्रो. राजेश्वर आचार्य उपस्थित थे। संचालन किया डॉ. प्रीतेश आचार्य ने। प्रमोद मिश्रा ने अतिथियों का स्वागत किया। आभार जताया डॉ. रत्नेश वर्मा ने।
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