वाराणसी। सरकारी मशीनरी भी अजब-गजब तरीके से काम करती है। सूबे की पिछली सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा ‘वरुणा कॉरिडोर’ इसका जीता-जागता उदाहरण है। एक तरफ डीएम आवास के ठीक पीछे वरुणा नदी के डूब क्षेत्र पर कब्जा किया जाता रहा, सरकारी जमीन के विनिमय का खेल कर उस पर आलीशान होटल बनाने की तैयारियां चलती रहीं, नदी किनारे की हरियाली नष्ट की जाती रही, नदी का प्राकृतिक स्वरूप खत्म किया जाता रहा, गंदे नाले बेरोक-टोक नदी में गिरते रहे और दूसरी तरफ इन सबसे आंखें मूंदे ड्रीम प्रोजेक्ट का काम चलता रहा। मंत्री-अफसर काम की प्रगति का निरीक्षण करने आते रहे लेकिन सूखती-कराहती वरुणा उन्हें नहीं दिखी, नदी के प्राकृतिक स्वरूप से किया जा रहा खिलवाड़ उन्हें नहीं दिखा।
और तो और सूखती नदी में पानी के प्रवाह का इंतजाम किए बिना ही 201 करोड़ रुपये के कॉरिडोर की योजना बना दी गई। इसके लिए अब तक 125 करोड़ रुपये शासन से मिले हैं जिनसे कॉरिडोर का काम कराया जा रहा है। इस योजना में नदी में पानी की उपलब्धता शामिल ही नहीं है। नदी का चैनलाइजेशन तो किया जा रहा है लेकिन आज भी कहीं-कहीं नदी की तलहटी सूखी पड़ी है। नदी विशेषज्ञों की मानें तो नदी के प्राकृतिक जल और उसके प्रवाह को स्थायी रखे बिना ऐसी योजनाएं किसी काम की नहीं। क़ॉरिडोर प्रोजेक्ट के अनुसार गर्मी के दिनों में जब जल की उपलब्धता बेहद कम हो जाती है, ज्ञानपुर पंप कैनाल के कनेरी स्केप से मोरवा ड्रेन के माध्यम से 150 क्यूसेक गंगा जल वरुणा में छोड़ा जाएगा। यह जल पुनऱ् आदिकेशव घाट के पास गंगा में मिल जाएगा। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता केएन जायसवाल ने बताया कि ज्ञानपुर पंप कैनाल से 500 क्यूसेक पानी सोमवार को वरुणा में डाला जाएगा। चूंकि अभी गरमी काफी है। इस नाते नदी की सूखी तलहटी पानी काफी सोखेगी। वाराणसी तक पानी पहुंचने में तीन दिन का समय लग जाएगा। इसके बाद बीच बीच में लगातार पानी गंगा से लेकर डाला जाएगा।