हम इस गैलरी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि हिंदू, बौद्ध और जैन विचारधाराएं भारत से निकलकर कैसे पूरे विश्व में प्रचारित प्रसारित हुईं। भारतीय संस्कृति के जो तत्व वहां गए, उन्हें हम साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत करेंगे।
उन्होंने चौबेपुर की जनता को धन्यवाद देते हुए कहा के लोग इस धरोहर के वास्तविक संरक्षक हैं। आज स्थानीय निवासियों ने जिस गर्व और आत्मीयता के साथ अपने इलाके की इस खोज को एनएचएमसी को सौंपा वह इस शिवलिंग की तरह ही दुर्लभ है।
इस शिवलिंग की कलात्मक विशेषताएं प्रतिहार कालीन शैली की उत्कृष्टता को दर्शाती हैं और स्थानीय कारीगरों की निपुणता इसमें साफ दिखाई देती है। ऐसी खोजें यह समझने में मदद करती हैं कि हमारी पुरानी बसाहटें कितनी विकसित और परिपक्व हुआ करती थीं।
इस दाैरान बीएचयू के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे, कृषि वैज्ञानिक अखिलेश चौबे, शिक्षक अतुल चतुर्वेदी, विनोद चतुर्वेदी, अपूर्व कुमार तिवारी, मनीष सिंह, दिलीप सेठ सम्मिलित रहे। संचालन सृजन चतुर्वेदी ने किया।