काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि महीने के पहले दिन मौनी अमावस्या और दूसरे दिन गुप्त नवरात्र की शुरुआत होने के बाद इस महीने तिलकुंद चतुर्थी, वसंत पंचमी, सूर्य सप्तमी, नर्मदा जयंती, महानंदा नवमी, जया एकादशी, तिल द्वादशी, कुंभ संक्रांति, प्रदोष, स्नान-दान की माघी पूर्णिमा और विजया एकादशी शामिल हैं। जिनमें श्रद्धालु व्रत रख विशेष पूजा-आराधना और पूजा-पाठ, व्रत और दान-पुण्य करेंगे।
डॉ. गणेश मिश्र ने बताया कि खास बात ये है कि फरवरी में हिंदी कैलेंडर के मुताबिक 16 फरवरी तक माघ मास रहेगा। इस तिथि तक आने वाले तीज-त्योहार माघ माह की परंपरानुसार होंगे, जबकि 17 फरवरी से फाल्गुन महीना शुरू हो जाएगा। इसके बाद के त्योहारों में तिल के बजाय मेवा और मिठाइयों का भोग लगेगा और मंदिरों में भगवान का शृंगार भी बदल जाएगा। इस महीने तीर्थ स्नान और अन्य परंपराओं में भी बदलाव होने लगेगा।