वाराणसी। रंगभरी एकादशी पर 354 साल पुरानी परंपरा के तहत काशीवासी बाबा विश्वनाथ की गौरा संग पालकी के नयनाभिराम दर्शन को आतुर हैं। बाबा भी मां गौरा के गौने के लिए शुक्रवार को ही पहुंच चुके हैं। महंत आवास पर गीत-गवनई के साथ गौने की रस्में भी शुरू हो चुकी हैं। बाबा के अखंड दीप के खप्पर के काजल से माता के नैनों का शृंगार होगा। मां अन्नपूर्णा के दरबार से आए सिंदूर से माता की मांग भरेगी। भोग आरती के बाद दोपहर एक बजे पालकी का दर्शन आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा।
मान्यता के अनुसार बाबा विश्वनाथ कैलाश पर्वत से चलकर राजसी स्वरूप में हिमपुत्री पार्वती का गौना कराकर कैलाश लाए थे। महंत आवास पर काशी पुराधिपति के रजत प्रतिमाओं का दर्शन भोग आरती के बाद शुरू हो जाएगा, जो पालकी उठने के पूर्व तक निरन्तर चलता रहेगा। सांय पांच बजे बाबा की पालकी की शोभायात्रा मंहत आवास से मंदिर तक जाएगी।
सिंदूर दान संग भराएगा मां गौरा का अंचरा
महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि रंगभरी एकादशी पर मंगल बेला में 3:30 बजे बाबा विश्वनाथ मां पार्वती और भगवान प्रथमेश की चल प्रतिमाओं का हल्दी पूजन होगा। उसके बाद दूध, दही, शहद, गंगाजल से स्नान कराया जाएगा। फिर मंगला आरती की जाएगी। इसके बाद भोर में 4:30 बजे से 6 बजे तक वैदिक ब्राह्मणों द्वारा विशेष षोडशोपचार पूजन रुद्राभिषेक किया जाएगा। भोर 6:30 बजे से 8:30 बजे तक मातृका पूजन होगा। 9 बजे चल प्रतिमाओं का राजसी शृंगार किया जाएगा। महंत डॉ. तिवारी ने बताया कि रजत प्रतिमाओं का शृंगार करने के बाद बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह में जलते अखंडदीप के खप्पर से काजल लाया जाएगा। मां गौरा नेत्रों में उस श्यामल को सजाया जाएगा। इन समस्त शृंगार में प्रमुख होगा मइया के मांग का सिंदूर अर्चन, जिसका अनुष्ठान महंत परिवार दीक्षित मंत्रों से संपन्न कराएगा।