वाराणसी। कभी सूनी-सपाट और खामोश रही दीवारें काशी की गौरवगाथा सुनाने दिखाने को तैयार है। रंगों की चटख पंक्तियां इन दीवारों को न केवल सजा-संवार रही हैं बल्कि यहां की संस्कृति, सभ्यता और धर्म के साथ घाटों और मंदिरों का जादू भी अंकित कर रही हैं। किसी दीवार पर महादेव का तांडव है तो कहीं महात्मा बुद्ध का दर्शन। काशी की हर खूबी को दीवारों पर सहेजा जा रहा है।
प्रवासी भारतीय सम्मेलन के लिए भोजूबीर से ऐढ़े गांव तक के रास्ते पर ये अनूठी फनकारी काशी हिंदू विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और गंगापुर परिसर के छात्रों के भावी कलाकार कर रहे हैं। कभी धूल-मिट्टी से सनी दीवारें अब वर्ली, मधुबनी समेत थ्रीडी पेंटिंग से सज गई हैं। मोनी प्रजापति, श्रेया प्रजापति, मिली विश्वकर्मा, शिखा सिंह, अचला मौर्या, ऋषभ गुप्ता, संजय यादव, रोजी समेत 50 युवा कलाकारों की टीम कण-कण में देवाधिदेव के वास की मान्यता को प्रदर्शित कर रही है।
दीवारों पर गहरे हरे नीले रंग के संयोजन के साथ शंकर तांडव नृत्य मुद्रा में दिख रहे हैं। काशी की सशक्त पहचान सारनाथ और महात्मा बुद्ध से लेकर विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला भी दीवारों पर चटख रंगों से उभारी गई है। प्रभु श्रीराम के साथ मां सीता, लक्ष्मण के वन गमन के प्रसंग को खींचा गया है। काशी की बात बिना घाट, गंगा आरती और मंदिरों के अधूरी है। छात्रों ने इसे भी बखूबी समझा। दीवारों पर गंगा दर्शन का चित्रण अपने पूरे सौंदर्य के साथ दिखता है।
कोलकाता के चित्रकार भी हुनर दिखाने को तैयार
ऐढ़े गांव के टेंट सिटी में प्रवेश करते ही प्रवासियों के आकर्षण का केंद्र बनेगी कोलकाता के चित्रकारों की कलाकारी। एक तरफ 150 फीट लंबे व 20 फीट और दूसरी तरफ 82 फीट लंबे व 26 फीट ऊंचे कैनवास पर ये कलाकार भी काशी दर्शन कराने को तैयार है। गौतम मुखर्जी के नेतृत्व में 11 कलाकारों की टीम कैनवास पर काशी को जीवंत करने में लगी है।