वाराणसी। बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में खाद्यान्न की कमी सहित खेती किसानी को नया आयाम दिलाने पर वैज्ञानिकों ने मंथन किया। शताब्दी कृषि सभागार में पहले दिन उद्घाटन समारोह में असम कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अमरनाथ मुखोपाध्याय ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों की चर्चा करते हुए इस पर शोध के लिए युवा वैज्ञानिकों का आह्वान किया।
कृषि शिक्षा एवं शोध में वैश्विक साझेदारी विषयक संगोष्ठी में डॉ. मुखोपाध्याय ने कहा कि देश में खाद्यान्न की कमी नहीं है फिर भी जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुसार शोध नहीं हुआ तो देश और किसान का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। डॉ. बीएल जलाली ने किसानों की समस्याओं पर ध्यान देने की बात कही। पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. केवी प्रभु ने कहा कि किसानों को यह वैधानिक अधिकार है कि वे अपने बीजों का प्रयोग कर सकते है और उन्हें किसी को पैसे देने की आवश्यकता नहीं है। बताया कि प्राधिकरण की ओर से अपनी प्रजाति को संरक्षित करने वाले किसानों को पुरस्कार देने के साथ ही अन्य सहयोग भी किया जाता है। कहा कि इस दिशा में कम्यूनिटी जीन बैग बनाने की कवायद चल रही है। जिसके माध्यम से किसान विलुप्त हो रही प्रजातियों को संरक्षित कर सकते हैं। अतिथियों का स्वागत संस्थान के निदेशक प्रो.ए वैशंपायन ने किया। इस दौरान पुरातन छात्र परिषद के अध्यक्ष प्रो. रमेश कुमार सिंह, संकाय प्रमुख प्रो. वंदना बोस, प्रो. रमेश चंद्र, डॉ. वीके पांडेय, प्रो. पीके शर्मा आदि मौजूद रहे।