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बबलू जिंदा है तो दाह संस्कार किसका हुआ

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सोनभद्र। कोन थाना क्षेत्र के बागेसोती गांव में करीब छह वर्ष बाद रामनंदन का पुत्र बबलू रविवार को पुलिस के प्रयास से लौट आया। सोमवार को भी उसे देखने वालों की भीड़ उसके घर पहुंची। उसके जिंदा लौटने पर गांव के लोग इस बात की चर्चा करने लगे हैं कि आखिरकार परिवार वालों ने जिस मृतक के शव का दाह संस्कार छह साल पूर्व कर दिया वह बालक कौन था।
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कोन थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत बागेसोती के सिंगा गांव का बबलू पुत्र रामनंदन 2012 में झारखंड के डाल्टेनगंज से गुम हो गया था। उस समय बबलू की उम्र करीब 12 वर्ष थी। उसके गायब होने की गुमशुदगी भी उसी समय डाल्टेनगंज में दर्ज हुई थी। लोगों की माने तो गायब होने के कुछ समय बाद डाल्टनगंज में एक नाबालिक का शव बरामद हुआ था। जिसके बाद स्थानीय पुलिस रामनंदन को शिनाख्त के लिए बुलाया था। उस समय रामनंदन ने शव की शिनाख्त अपने बेटे बबलू के रूप में की थी। बाद में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मामले में नया मोड़ तब आया जब कोन थाना को सूचना मिली कि क्षेत्र का एक युवक उड़ीसा में है। बाद में पुलिस ने संपर्क स्थापित करके युवक को बुलाया और पुन: उसके मां-बाप से शिनाख्त कराई तो रामनंदन ने युवक को अपना खोया हुआ बेटा बबलू बताया। पुलिस ने इसी आधार पर बबलू की सुपुर्दगी रामनंदन को दे दी। ग्रामीणों में चर्चा है कि वर्ष 2012 में रामनंदन ने जिसे अपना बेटा बताकर अंतिम संस्कार किया था वह कौन था। हालांकि कोन थाना पुलिस का कहना है कि झारखंड पुलिस को बबलू के बरामद होने की जानकारी दे दी गई है।
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