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गाजीपुर हिंसा: हेड कांस्टेबल की हत्या में 11 गिरफ्तार, 32 के खिलाफ दर्ज हुआ केस

Mon, 31 Dec 2018 05:19 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर
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हेड कांस्टेबल सुरेश वत्स का पार्थिव शरीर - फोटो : अमर उजाला
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कठवामोड़ पर जाम के दौरान शनिवार को निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा किए पथराव में हेड कांस्टेबल सुरेश प्रताप वत्स की मौत के मामले में 11 और सुहबल व करंडा थाना क्षेत्र में चक्काजाम में करने के मामले में निषाद पार्टी के नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की जांच एसपी सिटी प्रदीप दुबे को सौंप दी गई है। मुख्य आरोपी निषाद पार्टी का महासचिव अर्जुन कश्यप अभी फरार है। एडीजी पीवी रामाशास्त्री ने कहा कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

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एडीजी ने पत्रकारों से कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सभा समाप्त होने के बाद करीमुद्दीनपुर थाना पुलिस के लौटने के दौरान थानाध्यक्ष को आदेश दिया गया था कि कठवामोड़ पुल के पास आरक्षण की मांग को लेकर निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जाम लगाया है, उन्हें समझा कर जाम समाप्त कराया जाए। इस पर पुलिस वहां पहुंची और जाम समाप्त कराने के लिए लोगों को समझाने लगी। इसी बीच लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। पथराव में  करीमुद्दीनपुर थाना पर तैनात हेड कांस्टेबल सुरेश प्रताप वत्स गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिससे उनकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में चोट लगने से मौत का कारण स्पष्ट हुआ है।

एडीजी बोले, मुख्य आरोपी निषाद पार्टी के महासचिव पर लगेगा रासुका
एडीजी पीवी रामाशास्त्री ने कहा कि हेड कांस्टेबल की हत्या के मामले में  नोनहरा थाना में 32 नामजद और डेढ़ सौ अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई है।  इसके अलावा विभिन्न धाराओं में दो थाना क्षेत्र में चक्काजाम करने के मामले में साढ़े तीन सौ अज्ञात और चार नामजद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। हत्या करने और जाम लगाने के मामले में कुल 20  लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मुख्य आरोपी निषाद पार्टी का महासचिव अर्जुन कश्यप फरार है। उसके खिलाफ रासुका की कार्रवाई की जाएगी।
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पुलिस कर्मी की हत्या कानून-व्यवस्था के लिए दुर्भाग्यपूर्ण
हेड कांस्टेबल सुरेश प्रताप वत्स की मौत के बाद रविवार को पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम करा कर परिजनों को सौंप दिया। पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद कांस्टेबल के पुत्र विनीत सिंह ने कहा कि यह कानून व्यवस्था के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है कि पुलिस वालों की ही हत्या हो जा रही है। जब प्रदेश में पुलिस ‘अपनों’ की रक्षा नहीं कर पा रही है तो फिर जनता की सुरक्षा कैसे करेगी। भीड़ की कोई सूरत नहीं होती है। फिर भी मैं पुलिस से यह अपेक्षा करता हूं कि वह मेरे पापा के कातिलों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजेगी। कहा कि अभी तक मेरे या मेरी मां के पास सरकार द्वारा आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की कोई सूचना नहीं आई। 

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