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मारपीट की जानकारी के बावजूद नहीं चेता प्रशासन

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वाराणसी। बीएचयू में मारपीट, पत्थरबाजी और पेट्रोल बम चलने की घटना से विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही फिर सामने आ गई है। रविवार दोपहर में दो गुटों के बीच मारपीट के बाद ही अगर प्रशासन चेत गया होता तो शायद रात में बवाल नहीं होता। विश्वविद्यालय के खुफिया तंत्र को भी इसकी भनक नहीं लगी। यही नहीं, हर बार उपद्रव करने वाले छात्रों पर कार्रवाई की बात कही जाती है लेकिन खानापूर्ति होती है।
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विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल बोर्ड में 900 सुरक्षाकर्मी है। कैंपस में 500 से अधिक सुरक्षाकर्मी परिसर में ही तैनात रहते हैं। पिछले साल सितंबर में मेडिकल और कला संकाय के छात्रों के बीच मारपीट, आगजनी की घटना के बाद डीएम और एसएसपी ने कुलपति, चीफ प्रॉक्टर के साथ बैठक कर सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने और खुफिया तंत्र को मजबूत करने को कहा था लेकिन इसका कोई असर नहीं पड़ा। रविवार को स्पंदन की प्रतियोगिता के दौरान दो छात्रों के आपस में लड़ने और एक छात्र की पिटाई के समय सुरक्षा कर्मी वहां मौजूद थे। सुरक्षाकर्मियों से लेकर प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसका ही परिणाम रहा कि रात आठ बजे बिड़ला ए और सी के छात्र आमने-सामने आ गए।
स्पंदन में हर साल होती हैं मारपीट की घटनाएं
विश्वविद्यालय के अंतर संकाय युवा महोत्सव स्पंदन के दौरान छात्रों के बीच मारपीट की यह पहली घटना नहीं है। लगभग हर साल महोत्सव के दौरान इस तरह की छोटी-बड़ी घटनाएं हो जाती हैं। पिछले साल भी एंफीथिएटर मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान छात्रों के दो गुटों में मारपीट हुई थी। इसके अलावा प्रतियोगिताओं के परिणाम और पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान भी छात्र आपस में भिड़े थे। इसके बाद सभी आयोजन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था जरूर बढ़ाई गई थी।
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समय से पहुंची पुलिस लेकिन आगे नहीं बढ़ी
घटना की सूचना मिलने के बाद एसपी सिटी के नेतृत्व में पांच थानों की फोर्स विश्वविद्यालय में समय से पहुंच गई लेकिन कोई भी आगे नहीं बढ़ा। ऐसा इसलिए कि विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुमति नहीं मिली। पिछली घटनाओं में पुलिस आगे बढ़ी थी तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें ही जिम्मेदार ठहरा दिया था। इसके बाद से फोर्स के साथ जाने वाले अधिकारी आगे नहीं जाते हैं। इस बार भी ऐसा हुआ। डेढ़ घंटे तक छात्र लड़ते रहे लेकिन पुलिस एलडी गेस्ट चौराहे पर ही खड़ी रही।
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