वाराणसी। बीएचयू के उर्दू विभाग की ओर से गुरुवार को गोष्ठी, गजल, शायरी से जाने माने शायर मिर्जा गालिब को याद किया गया। उनकी 149 वीं पुण्यतिथि पर जहां वक्ताओं ने उनके साहित्यिक, सांस्कृतिक योगदान की चर्चा की वहीं, शायरी पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने बढ़चढ़कर भागीदारी की। उधर, शाम को संगीत एवं मंच कला संकाय के शिक्षक, छात्रों के साथ ही उर्दू के विद्यार्थियों ने गजलों का गायन किया।
उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. आफताब अहमद आफाकी के निर्देशन में कला संकाय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं ने गालिब की गजल दिल से तेरी निगाह, जिगर तक उतर गई का गायन कर उन्हें याद किया। इसके बाद मंच कला संकाय के प्रोफेसर विजय कपूर जैसे ही मंच पर आए तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा सभागार गूंज उठा। उन्होंने तबले पर पंकज की संगत में दिले नादां तुझे हुआ क्या है, आखिर इस दर्द की दवा क्या है की प्रस्तुति की। इसके बाद कोई उम्मीद बर नहीं आती, कोई सूरत नजर नहीं आती आदि गजलों की प्रस्तुति कर सभी का दिल जीत लिया। इसके बाद चंदन वर्मा ने गालिब की गजल हजारों ख्वाहिशें ऐसी की हर ख्वाहिश पर दम निकले। हर एक बात पे कहते हो तुम के तु क्या है। तबले पर अभिनव नारायण ने संगत किया। इसके बाद मासूम अली ने क्यू कर उस बुत से रखूं जान अजीज, क्या नहीं है मुझे इमान अजीज। दिल लगाकर लग गया उनको भी तनहा बैठना की प्रस्तुति से तालियां बटोरी। इस दौरान कला संकाय प्रमुख प्रो. श्रीनिवास, डॉ. मुशर्रफ अली, रिषि कुमार आदि लोग मौजूद रहे।