फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुविधाएं दुरुस्त करें, समय से काम पूरे कराएं

विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के डीआरएम सतीश कुमार ने शनिवार को कैंट रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया। उन्होंने यात्री सुविधाओं की हकीकत जाने के साथ ही विकास कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता की जांच की। इस मौके पर उन्होंने सुविधाओं को दुरुस्त करने और समय पर सारे काम पूरे कराने का निर्देश दिया।
विज्ञापन

डीआरएम ने प्लेटफार्मों और स्टेशन परिसर की सफाई व सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने का निर्देश दिया। ट्रेनों के प्लेटफार्म बदलने की शिकायतों पर उन्होंने गंभीर रुख दिया। कहा कि केवल टर्मिनेट होने वाली ट्रेनों के प्लेटफार्म बदले जाएं। यहां से संचालित होने वाली या गुजरने वाली ट्रेनों के प्लेटफार्म किसी सूरत पर न बदले जाएं। उन्होंने प्लेटफार्म नंबर एक पर बन रहे वाशेबल एप्रन का काम देखा। वहीं, सर्कुलेटिंग एरिया में विकास कार्यों का जायजा लेते हुए यहां खुले मैनहोल को बंद कराने को कहा। साथ ही नए यात्री प्रतीक्षालय में सभी जनरल टिकट काउंटर शिफ्ट करने का सुझाव दिया। कहा कि इससे मुख्य भवन के हाल से भीड़ कम होगी और नए यात्री प्रतीक्षालय का समुचित उपयोग हो सकेगा।
प्लेटफार्म नंबर पांच के ऊपरी तल पर स्थित यात्री प्रतीक्षालय का ताला शनिवार को करीब करीब डेढ़ साल खोला गया। डीआरएम ने हिदायत दी कि प्रतीक्षालय पर अब ताला नहीं लगाना चाहिए। साथ ही यहां की सुविधाएं भी तत्काल दुरुस्त कराई जाएं। सेकेंड एंट्री स्थित प्रतीक्षालय के भी बंद होने पर भी नाराजगी जताई और उसे तत्काल खुलवाने का निर्देश दिया।
विज्ञापन

आरक्षण केंद्र के वीआईपी, सीनियर सिटीजन और पत्रकार के लिए खोले गए काउंटर नंबर 905 को जनरल बना दिया गया है। डीआरएम ने कहा कि इसे जनरल रखा जाए लेकिन वीआईपी के लिए दूसरे काउंटर की व्यवस्था हो और विशेष लोगों को वरीयता के आधार पर टिकट दिया जाए। वहीं, स्टेशन से मालगोदाम जाने वाली सड़क की खस्ता हालत पर नाराजगी जताई। उन्होंने 15 दिन में सड़क की मरम्मत कराने और अनधिकृत तरीके से ट्रकों के खड़े होने पर रोक लगाने का निर्देश दिया।
स्टेशन के सेकेंड एंट्री की तरफ के विस्तारीकरण के काम पर विराम लग सकता है। उस पार दो लाइनें बिछाई जानी हैं। इसके लिए सेना अपनी जमीन देने को तैयार नहीं है। डीआरएम ने बताया कि यहां जितनी जमीन की जरूरत थी, उतनी जमीन सेना को लखनऊ में दे दी गई थी। बाद में उनकी ओर से मना कर दिया गया। ऐसे में स्टेशन परिसर और ट्रैक के विस्तार का काम रुक गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें