रमन मैग्सेसे पुरस्कार से पुरस्कृत जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा है कि जिस तरह की मानव रचित आपदा से उत्तराखंड जूझा है, यूपी में भी कुछ वैसी ही परिस्थितियां बनाई जा रही हैं।
उन्होंने यूपी सरकार को तत्काल नदी नीति घोषित करने और नदी, तालाब व झील की जमीन का चिन्हांकन व सीमांकन कर नदियों के किनारे हर तरह के निर्माण कार्यों पर रोक लगाने की मांग की है।
जल-जन जोड़ो अभियान के सिलसिले में विभिन्न प्रदेशों की यात्रा कर यहां पहुंचे सिंह ने कहा कि हर कोई इस बात को मान रहा है कि उत्तराखंड की आपदा मानव निर्मित आपदा थी न कि प्रकृति निर्मित।
उत्तराखंड की ही तरह यूपी में भी प्राकृतिक जल स्रोत नष्ट किए जा रहे हैं। वन क्षेत्र कम हो रहे हैं। भूगर्भीय जल स्तर तेजी से घट रहा है। निजी क्षेत्र की कंपनियां प्रकृति का शोषण कर रही हैं। नदियों का आकार खत्म हो रहा है। ऐसे में यूपी में भी कभी भी इस तरह की आपदा आ सकती है।
उन्होंने कहा कि लालची विकास को रोक कर प्राकृतिक जल संसाधनों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर सामुदायिक अधिकारों को बढ़ावा देने वाली नीति पर काम होना चाहिए। उन्होंने बताया कि जल-जन जोड़ो अभियान का अच्छा असर सामने आया है।
नदियां बचाने को लोग खुद आगे आए हैं। झांसी में लक्ष्मी झील को लोगों ने 15 दिन केश्रमदान से साफ कर दिया। यह अभियान अब तक 15 राज्यों तक पहुंच चुका है। इस समय उत्तराखंड पर केंद्रित अभियान चल रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की मानव सृजित आपदा के दोषियों को चिह्नित किया जाना चाहिए। उन्हें दंडित किया जाना चाहिए। सिंह ने कहा कि दिल्ली में लोक प्रशासन संस्थान में तमाम विशेषज्ञों केसाथ चर्चा कर उत्तराखंड पुनर्निर्माण को लेकर एक प्रारूप तैयार किया गया है।
इसे जल्द ही केंद्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को सौंपा जाएगा। इसमें तमाम महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं जो हर सरकार के लिए उपयोगी होंगे।