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जिंदगी की जंग के वो 72 घंटे...

Mon, 01 Jul 2013 12:29 AM IST
बरेली/ब्यूरो
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जिंदगी की जंग के वो 72 घंटे सेना के जवान कभी नहीं भूल पाएंगे। केदारनाथ में आपदा के समय बरेली की 883 एनिमल ट्रांसपोर्ट बटालियन के दो जेसीओ और 29 जवान मौजूद थे।
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पानी का खौफनाक इरादा भांपते ही वे प्रलय आने से पहले ही हजारों श्रद्धालुओं को साथ लेकर एक सुरक्षित पहाड़ी पर पहुंच गए। पानी के तेज बहाव ने उन्हें दोबारा उतरने का मौका नहीं दिया और सब कुछ तबाह कर दिया।

16 जून को दोपहर तीन बजे अचानक से बारिश ने गौरीकुंड के पास नदी में उफान पैदा कर दिया। वहां मौजूद 883 बटालियन के जेसीओ नायब सूबेदार आरएस गुर्जर और नायब सूबेदार वीपी शर्मा ने तत्काल फैसला लिया और श्रद्धालुओं को ऊपर की पहाड़ी ओर भेजना शुरू कर दिया।
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दोनों जेसीओ और जवानों ने अपने 22 खच्चरों के साथ इस काम को युद्धस्तर पर अंजाम दिया। जितनी देर में पहाड़ी पर लोग सुरक्षित पहुंचे, उतनी ही देर में मुंडकटिया गणेश मंदिर के पास सेना के बेस कैंप समेत पूरा गौरीकुंड नक्शे से गायब हो गया।

पहाड़ी पर लोगों ने पूरी रात बारिश में भीगते हुए गुजारी। 17 जून की सुबह आठ बजे अचानक करीब दो सौ फीट की ऊंचाई से जल प्रलय का नजारा देखने को मिला। पास ही की एक बिल्डिंग बह गई जिसमें सेना की सारी रसद भी थी।

लोगों ने पहाड़ी पर तीन दिन भूखे-प्यासे रहकर भगवान का नाम लेकर बिताए। कई लोगों की भूख से हालत बिगड़ने लगी कि 19 जून की सुबह राहत सामग्री लेकर हेलीकाप्टर पहुंचा।

खाना मिला तो सेना के जवानों ने खुद भूखा रहकर पहले श्रद्धालुओं को खाना खिलाया ताकि भूख की वजह से किसी की जान न जाए। इसके बाद शुरू हुआ हेलीकाप्टर से श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का सिलसिला।

हादसे से सुरक्षित बचकर बरेली लौटे जवानों ने अपने अनुभव सुनाते हुए बताया कि उस खौफनाक मंजर के बारे में सोचकर भी सिहरन होती है।

नायब सूबेदार आरएस गुर्जर ने कहा कि आपदा में फंसने के बाद भी हमारी कोशिश रही कि अधिक से अधिक लोगों को बचा लिया जाए। राहत की बात यह रही कि हादसे में हमारी कंपनी का कोई हताहत नहीं हुआ।

पुल टूटा तो तीन दिन लगाया चक्कर
केदारनाथ के नेशनल हाईवे पर स्थित सोनप्रयाग का पुल टूट जाने से सेना के जाने का रास्ता ही बंद हो गया। 883 बटालियन के जवान तीन दिन तक पैदल चले और पहाड़ों पर 130 किमी का चक्कर लगाकर 22 जून को तैला गांव पहुंच सके।

तैला गांव में ही बरेली से बटालियन के कमांडेंट कर्नल संजीव पटियाल व कंपनी कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक गौतम ट्रकों का काफिला लेकर उनकी मदद को पहुंचे। 25 जून को खच्चरों और जवानों को ट्रक में सुरक्षित लेकर काफिला रवाना हुआ। छह दिन लगातार सफर करने के बाद सेना की टीम रविवार को बरेली पहुंची।
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