उत्तराखंड तबाही में लापता हुए तीर्थयात्री कब लौटकर आएंगे, कोई नहीं जानता। यकीन करना मुश्किल है कि त्रासदी के दर्दनाक वक्त में भी मुआवजे का लालच फरेबी बना सकता है।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक ऐसा मामला पकड़ में आया है, जिसमें सात साल से लापता चल रहे बुजुर्ग को उसके बेटे ने केदारनाथ यात्रा पर दिखाकर उसकी गुमशुदगी दर्ज करा दी। तहसीलदार की जांच में पूरा मामला पकड़ा गया।
सूबे के हर जिले में उत्तराखंड से लापता लोगों के लिए हेल्प डेस्क बनाई गई है। एडीएम कार्यालय पर बनी इस डेस्क पर लापता नौ लोगों के परिजनों ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी। डीएम सुरेंद्र सिंह ने जांच के लिए लापता लोगों के घर तहसील की टीमें भेजी। इस दौरान रहतूलाल का मामला पकड़ में आ गया।
सहारनपुर के मोहल्ला मोरगंज के मूल निवासी रहतू लाल पुत्र पन्नालाल का परिवार पिछले काफी समय से मुजफ्फरनगर के गांधीनगर में रह रहा है। सात साल पहले रहतू लाल लापता हो गया। इस दौरान उसकी तमाम जगह खोजबीन की गई, लेकिन कोई पता नहीं चला।
उत्तराखंड त्रासदी के बाद 30 जून को रहतू के बेटे मदन मोहन ने हेल्प डेस्क पर केदारनाथ में पिता की गुमशुदगी दर्ज करा दी। राजस्व निरीक्षक सत्यवीर सिंह और लेखपाल अरविंद जांच के लिए घर पहुंचे। रहतू की पत्नी से पूछताछ में सच का खुलासा हुआ। मदनमोहन ने इस बारे में अपनी मां को पहले से कुछ नहीं बता रखा था, यही वजह थी कि उसने पूरी सचाई बता दी।
मुफलिसी ने किया मजबूर
मदन मोहन का परिवार गुरबत से जूझ रहा है। परिवार की रोजी-रोटी लिफाफे बनाकर चलती है। मदन का बड़ा बेटा विकलांग है, कई बेटियों के विवाह की जिम्मेदारी भी उसके ऊपर है। इसी हालात ने उसे पिता की झूठी गुमशुदगी के लिए मजबूर कर दिया।