छात्रों का निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों से मोह भंग हो रहा है। इन कॉलेजों में बीटेक की सीटों पर प्रवेश लेने वाले नहीं मिल रहे हैं। सीटें खाली रहने से कॉलेज प्रबंधन का खर्च नहीं निकल पा रहा है, इसलिए खर्च निकालने के लिए प्रबंधन अब डिप्लोमा कोर्स की ओर भाग रहा है।
106 निजी कॉलेजों को मिली इजाजत
इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में अब तक 106 निजी इंजीनियरिंग कॉलेज डिप्लोमा कोर्स की अनुमति प्राप्त कर चुके हैं। ये कॉलेज सेकंड शिफ्ट में डिप्लोमा कोर्स की पढ़ाई कराएंगे। हर कॉलेज में डिप्लोमा की 120 सीटें होंगी।
''प्राविधिक शिक्षा परिषद के सचिव आरके वर्मा कहते हैं कि निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सेकंड शिफ्ट में डिप्लोमा कोर्स की डिमांड तेजी से बढ़ी है।''
सीट भरने के लिए होता रहा 'खिलवाड़'
प्रदेश में वर्ष 2000 के बाद निजी क्षेत्रों में तेजी से इंजीनियरिंग कॉलेज खुले। देखते ही देखते निजी कॉलेजों की संख्या 712 के ऊपर निकल गई। इन कॉलेजों के खुलने से बीटेक और एमबीए सीटों की भरमार हो गई। प्राविधिक विश्वविद्यालय इन कॉलेजों की सीटों को भरने के लिए बार-बार नियम शिथिल करता है।
खर्च निकालने में पड़े लाले
इसके बाद भी इनकी सभी सीटें नहीं भर पाती हैं। इसके चलते स्थिति यह हो गई है कि निजी कॉलेजों का खर्च तक नहीं निकल पा रहा है, इसलिए निजी इंजीनियरिंग कॉलेज प्रबंधन अब सेकंड शिफ्ट में डिप्लोमा कोर्स चलाना चाहता है। ऐसे कॉलेजों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है।
लगातार आ रहे हैं आवेदन
पहले साल 54 कॉलेजों को अनुमति दी गई थी इस बार 52 कॉलेजों को अब तक अनुमति दी जा चुकी है। अभी निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों के आवेदन प्राप्त हो रहे हैं। प्राविधिक शिक्षा परिषद इस संबंध में प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजता है और वहां से अनुमति दी जाती है।