पाकिस्तान के उस्मानाबाद में उत्तर प्रदेश के अमरोहा के एक परिवार पर कातिलाना हमले में कुनबे के तीन लोगों समेत ऑटो चालक की मौत हो गई।
कारोबार में रंगदारी न देने पर हमलावरों ने ऑटो रिक्शा में सवार इन लोगों पर सरेआम ताबड़तोड़ गोलियां बरसाते हुए मौत के घाट उतार दिया।
शुक्रवार को उस्मानाबाद में हुए कत्लेआम की खबर से शहर में मौजूद कई परिवारों में कोहराम मचा है।
शहर के मोहल्ला मजापोता (बगला) निवासी अब्दुल हक का परिवार बंटवारे के वक्त पाकिस्तान हिजरत कर गया था। जबकि, परिवार के कुछ लोग अमरोहा ही रुक गए थे।
बुजुर्गों की मौत के बाद खानदान के वकील अहमद व परवेज अहमद ने अपने बूते पाकिस्तान के उस्मानाबाद शहर में कारोबार खड़ा किया। इस दौरान परिवार का शहर में मौजूद रिश्तेदारों में आना जाना भी बदस्तूर लगा रहा।
शुक्रवार की सुबह उस्मानाबाद में वकील अहमद का बेटा शकील (48) अपने चचाजाद भाई अब्दुल खालिक (40) व नवैद (25) पुत्रगण परवेज अहमद के साथ एक अमेरिकी कंपनी से मीट का कांट्रेक्ट करने जा रहा था।
बताते है कि काफी दिनों से रंगदारी मांग रहे आतंकियों ने घात लगाकर इनके ऑटो रिक्शा पर हमला बोल दिया। ताबड़तोड़ गोलियां बरसाते हुए तीनों को मौके पर ही मौत के घाट उतार दिया। हमले में चालक भी मारा गया।
नवंबर में वीजा के फेर में फंसा था परिवार
बीते साल नवंबर की बात है, जब करांची के उस्मानाबाद गार्डन में रहने वाले अब्दुल खालिक रिश्तेदारों से मिलने के लिए परिवार समेत अमरोहा के मुहल्ला बगला आए थे।
वीजा के फेर में फंसने के बाद इस इस पाकिस्तानी परिवार को मुल्क छोड़ना पड़ा था। क्योंकि, गृह मंत्रालय ने मियाद पूरी होने के बाद हिंदुस्तान में रुकने की इजाजत नहीं दी थी।
दरअसल, पाकिस्तान में हुए इस कत्लेआम में आतंकियों का निशाना बने अब्दुल खालिक बीते वर्ष ग्यारह नवंबर को एक महीने की वीजा पर परिवार सहित अमरोहा आकर नियम और कानूनी पचड़े में पड़ गए थे।