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UP BJP List Analysis : आखिर क्यों गोरखपुर से चुनाव लड़ेंगे योगी आदित्यनाथ? पांच सवालों में जानें भाजपा की पहली सूची के मायने

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: विभास साने Updated Sat, 15 Jan 2022 02:47 PM IST

सार

BJP candidate List UP Election: भाजपा उम्मीदवारों की पहली सूची में कई मायने छिपे हैं। यह सूची बता रही है कि पार्टी ने नुकसान को रोकने और संतुलन साधने की कोशिश की है।
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : ANI



 

2# योगी के लिए आखिर गोरखपुर ही क्यों?

योगी आदित्यनाथ ने 1998 में पहली बार गोरखपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत गए। 2017 में मुख्यमंत्री बनने से पहले तक वे लगातार पांच बार गोरखपुर से सांसद रहे। जाहिर है कि गोरखपुर योगी का गढ़ है। भाजपा ने अयोध्या या मथुरा की जगह योगी को गोरखपुर से उतारने का फैसला इसलिए किया है क्योंकि यहां से चुनाव लड़ने के लिए खुद योगी या पार्टी को ज्यादा मेहनत नहीं करनी होगी। लिहाजा, पार्टी में मची हालिया उठापटक के मद्देनजर योगी पूरे प्रदेश में प्रचार पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।

3# क्या भाजपा विधायकों के पार्टी छोड़ने का असर पहली सूची में नजर रहा है?

इस सूची से साफ है कि भाजपा काफी सतर्क हो गई है। पहले कहा जा रहा था कि पार्टी 40 फीसदी विधायकों के टिकट काट सकती है, लेकिन पहली सूची में मात्र 21 टिकट काटे गए हैं, यानी करीब 20 फीसदी। इस तरह पार्टी ने डैमेज कंट्रोल किया है और संभावित बगावत को टालने के लिए पुराने चेहरों पर भरोसा किया है। 



पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा प्रयोगधर्मिता से भी बची है। भाजपा को चिंता है कि किसान आंदोलन से उसे ज्यादा नुकसान न हो। इस आंदोलन की वजह से कुछ विधायकों का गांवों में विरोध भी हुआ था। फिर भी पार्टी ने पुराने नाम रिपीट किए हैं। दूसरे दलों से आए नेताओं को भी टिकट मिले हैं। जैसे- बेहट सीट से कांग्रेस विधायक नरेश सैनी जीते थे। वे भाजपा में आ गए और पार्टी ने उन्हें टिकट दे दिया। छपरौली राष्ट्रीय लोक दल का गढ़ मानी जाती है। यह पिछले चुनाव में रालोद की जीती हुई इकलौती सीट थी। यहां से सहेंद्र सिंह रमाला जीते थे, लेकिन वे भाजपा में चले गए। इस बार उन्हें ही भाजपा ने टिकट दिया है। 


पार्टी ने युवा चेहरों को भी मौका दिया है। जैसे- मेरठ शहर सीट का मिजाज ऐसा रहा है कि यहां भाजपा एक बार जीत जाती है, दूसरी बार हार जाती है। यह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी की पुरानी सीट है। वाजपेयी भाजपा का बड़ा ब्राह्मण चेहरा हैं, लेकिन पार्टी ने इस बार युवा चेहरे कमल दत्त शर्मा को यहां से टिकट दिया है। इसी तरह मेरठ कैंट से भाजपा ने विधायक सत्य प्रकाश अग्रवाल की जगह अमित अग्रवाल को मौका दिया है। 

4# पहली सूची में कोई अल्पसंख्यक नहीं?

पहली सूची में महिलाओं की संख्या कम है। एक चौंकाने वाला नाम पूर्व राज्यपाल बेबी रानी मौर्य का है, जिन्हें आगरा से टिकट दिया गया है। भाजपा ने जातिगत संतुलन साधने की कोशिश की है। सर्वण, पिछड़े, दलित सभी को मौके दिए हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी तादाद में मुस्लिम वोटर हैं, इसके बावजूद भाजपा की पहली सूची में कोई मुस्लिम उम्मीदवार नहीं है। वहीं, बहुजन समाज पार्टी की बात करें तो मायावती ने 53 उम्मीदवारों की पहली सूची में 14 मुस्लिमों, 12 पिछड़े और नौ ब्राह्मणों को टिकट दिया है।

5# क्या अगली सूचियों में भी भाजपा पुराने चेहरों पर ही दांव खेलेगी?

यह कहना मुश्किल है। हाल ही में कुछ विधायक भाजपा से सपा में गए। हालांकि, दिलचस्प रूप से शनिवार को भाजपा की पहली सूची आने के वक्त ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बयान दिया कि भाजपा ने जिन विधायकों का टिकट काटा है, उन्हें अब सपा मौका नहीं देगी।

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