आईएएस अधिकारी दुर्गाशक्ति के निलंबन मामले में यूपी सरकार की चौतरफा आलोचना की जा रही है लेकिन वो अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है।
इस बीच आईएएएस ऑफिसर एसोसिएशन ने जो आंकड़े जारी किए हैं वो बताते हैं कि यूपी में निलंबित किए गए आईएएस अधिकारियों की संख्या सबसे ज्यादा है।
इन आंकड़ों के मुताबिक यूपी में पिछले 20 सालों में 105 आईएएस अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
यूपी में हुए 105 निलंबन में से 100 में अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों के पक्ष में कोई सबूत भी नहीं मिले हैं जिससे उनके खिलाफ बाद में कोई एक्शन भी नहीं लिया गया।
इनमें से 60 प्रतिशत अधिकारी यूपी में बहुजन समाज पार्टी की सरकार में निलंबित किए गए थे और 35 प्रतिशत अधिकारी वर्तमान समाजवादी पार्टी की सरकार में किए गए।
'राजनीतिक सेवक बन गए हैं अधिकारी'
दुर्गाशक्ति नागपाल के अचानक निलंबन मामले में पहले से ही उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना हो रही है। दुर्गाशक्ति को कादलुपर गांव में एक मस्जिद की दीवार गिराकर रमजान महीने में सांप्रदायिक सौहार्द का ध्यान न रखने के आरोप में निलंबित किया गया है।
यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने निलंबन के फैसले को सही ठहराया है। वह कह चुके हैं कि जैसे गलती करने पर बच्चे माता-पिता से सजा पाते हैं वैसे ही सरकार अधिकारियों की गलती पर सजा देगी।
हालांकि मामले के बाद आईं जांच रिपोर्ट में इस मामले में दुर्गाशक्ति की भूमिका से इनकार किया गया है। दुर्गाशक्ति ने इलाके में रेत माफियाओं पर लगाम लगाने की कोशिश कर रही थीं इसके चलते वो उनके निशाने पर भी थीं।
आईएएस असोसिएशन के एक अधिकारी के अनुसार सिविल सेवा का मतलब होता है जनता की सेवा लेकिन अब यह निजी सेवा बन गई है। अधिकारी राजनीतिक सेवक बन गए हैं।
एसोसिएशन के सचिव का कहना है कि निलंबन या तबादला अधिकारियों का मनोबल गिराता है। अधिकारियों का निम्नतम कार्यकाल तय होना चाहिए ताकि वह बिना डर के कुशलता से काम कर सकें।