दुश्मनों की तलाश में सर्च ऑपरेशन पर निकले सेना के जांबाज मेजर राहुल सिंह की कश्मीर में भारत-पाकिस्तान सीमा पर जान चली गई। मंगलवार की शाम मेजर का पार्थिव शरीर यूपी के बुलंदशहर में उनके पैतृक गांव जसनावली कला पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए क्षेत्रवासियों की भीड़ उमड़ पड़ी। सेना की सलामी के बाद मेजर का सम्मान से अंतिम संस्कार किया गया।
सेना के वेस्ट सूपी हेड क्वार्टर सब एरिया के कर्नल पीके शर्मा ने बताया कि राहुल सिंह 19 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) में मेजर थे। सोमवार रात मेजर राहुल 21 जवानों के साथ सर्च ऑपरेशन पर निकले थे। 30 मीटर ऊंची पहाड़ी से फिसलने के कारण राहुल सिंह खाई में जा गिरे।
सिर में गंभीर चोट लगने से उनकी मौत हो गई। मंगलवार शाम 5:30 बजे बाबूगढ़ और वेस्ट यूपी सब एरिया के जवान और अफसर मेजर राहुल सिंह का पार्थिव शरीर लेकर पैतृक गांव जसनावली कला पहुंचे।
बेटे का शव देख पिता हुए बदहवास
एंबुलेंस से तिरंगे में लिपटा राहुल का शव देख पिता उद्यम सिंह बदहवास हो गए। पत्नी पल्लवी ने होश खो दिया। गमगीन माहौल में अपने ही नहीं गैरों की आंखें भी नम हो गई। राहुल की बहन की गोद में मौजूद मासूम बेटी नौसी (दो वर्ष) के मासूमियत ने सबको रोने के लिए मजबूर कर दिया।
बुझ गया घर का चिराग
राहुल सिंह पिता उद्यम सिंह और स्वर्गीय मां सुदेश की इकलौती संतान थे। उद्यम सिंह यूपी पुलिस में सीनियर इंस्पेक्टर के पद से हाल ही में रिटायर हुए हैं। राहुल सिंह को दो वर्ष पुत्र पुत्री की प्राप्ति हुई थी। बताया गया है कि उद्यम सिंह के नाम पर 60 बीघा कृषि भूमि, मेरठ और गांव में घर है।
खुश मिजाज थे राहुल सिंह
राहुल सिंह के एक साथी जवान ने अमर उजाला को बताया कि राहुल सिंह जांबाज, खुशदिल, नेकदिल और मेहनती शख्स थे। वे देश के लिए जान देने का जज्बा रखने वाले इंसान थे।
कमीशन से बने थे अफसर
राहुल के पिता उधम सिंह उत्तर प्रदेश में पुलिस इंस्पेक्टर थे। पिता उधम सिंह ने लख्ते जिगर का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा देखा तो मानो कठोर सीना भी पिघल गया हो। गांव वालों ने बताया देश के लिए कुर्बान होने वाला राहुल जैसा बेटा हर घर में पैदा हो।
राहुल सिंह वर्ष 1999 में एनडीए की परीक्षा पास कर सेना में भर्ती हुए थे। वर्ष-2004 में वे कमीशंड हुए और सेना में मेजर बन गए। गांव वालों ने बताया कि एडीए की परीक्षा पास कर राहुल ने क्षेत्र का नाम रोशन किया था।