उत्तर प्रदेश में जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूवल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत सिर्फ तीन जिलों में ही सीवर लाइन बिछाने के लिए खोदी गई मिट्टी के नाम पर करोड़ों रुपए का खेल हो गया।
जिस मिट्टी से जल निगम करोड़ों रुपए कमा सकता था, उसे निस्तारित करने में करोड़ों रुपए खर्च कर दिए गए। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की टीम ने जब इसकी जांच की तो गड़बड़ी का खुलासा हुआ।
सीएजी की रिपोर्ट में बताया गया है कि अलग-अलग गहराइयों में विभिन्न व्यास वाली सीवर लाइन बिछाने के लिए भूमि का उत्खनन किया जाता है। सीवर पाइप लाइन डालने और भराव का काम पूरा होने के बाद बड़ी मात्रा में बची मिट्टी का निस्तारण शेष रहा जाता है।
बची हुई मिट्टी को मौके पर ही रॉयल्टी जमा करने के बाद बेचा जा सकता है। इससे दोहरा लाभ मिलता है। अव्वल तो इसके निस्तारण पर करोड़ों रुपए खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती और इससे राजस्व भी प्राप्त होता है।
यहां तक कि रॉयल्टी जमा करने के बाद मिट्टी मुफ्त में भी दे दी जाए तो उसके निस्तारण में एक रुपए का खर्च न आएगा लेकिन जल निगम की लापरवाही के कारण निस्तारण के नाम पर करोड़ों रुपए फूंक दिए गए।
वर्ष 2007 से 2012 के दौरान इलाहाबाद, लखनऊ, वाराणसी सहित उन सभी जिलों में जल निगम की लापरवाही के कारण मिट्टी के निस्ताण में लंबा खेल हुआ, जहां-जहां जेएनएनयूआरएम योजना के तहत सीवर लाइन बिछाई गई।
सीएजी की टीम ने नमूने के तौर पर सिर्फ आठ सीवरेज कार्यों की जांच की और पाया कि बची हुई मिट्टी की गणना और उसके निस्तारण में खामियों के कारण सात करोड़ 84 लाख रुपए गलत तरीके से खर्च कर दिए गए।
वह भी जुलाई 2008 से मार्च 2012 के बीच। यह तो एक नमूना है, नुकसान तो इससे कई गुना ज्यादा हुआ।
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि खोदी गई मिट्टी की नापजोख भी सही तरीके और निर्धारित फार्मूले के आधार पर नहीं की गई, जिसकी वजह से करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ।
सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नियमों के तहत सही तरीके से मिट्टी का निस्तारण किया गया होता तो सात करोड़ 84 लाख रुपए का नुकसान न होता।
साथ ही मिट्टी का विक्रय करने पर तीन करोड़ 22 लाख रुपए की अतिरिक्त आय होती।
ठेके की शर्तों में साफ लिखा हुआ था कि मिट्टी का निस्तारण आठ किलोमीटर के दायरे में किया जाएगा लेकिन ठेकेदार ने मिट्टी का निस्तारण (मिट्टी को कहीं फेंककर) निर्धारित दायरे में किया या नहीं, जल निगम के पास इस बाबत कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है।