शहीद होने वाले पुलिसकर्मियों में किसी को 50 लाख तो किसी को 10 लाख रुपये का मुआवजा मिला है। इसे लेकर घमासान मचा हुआ है।
सरकार के निर्णय पर सवाल उठाते हुए विभिन्न संगठनों ने इसका जवाब मांगना शुरू कर दिया है।
सरकार पर आरोप लग रहा है कि उसने शहीदों को दिए जाने वाली सहायता में भेदभाव किया।
आरटीआई कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने प्रमुख सचिव गृह को इस संदर्भ में पत्र भेजकर उनसे स्थिति स्पष्ट करने समान न्याय करने की बात कही है।
प्रमुख सचिव गृह को भेजे गए पत्र में सरकार से सवाल किया गया है कि शहीदों की शहादत का पैमाना तय करने के लिए सरकार ने कौन से मापदंडों का सहारा लिया है। किन वजहों से शहादत का वर्गीकरण किया गया।
पीपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष जुगुल किशोर ने भी सरकार की इस नीति पर असहमति जताई।
प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव को भेजे गए पत्र में सरकार से पूछा गया है कि किन हालात में सीओ जियाउल हक के परिवार के सदस्यों को 50 लाख की अनुग्रह राशि और परिवार के दो सदस्यों को नौकरी दी गई जबकि अन्य पुलिसकर्मियों के लिए यही राशि महज 10 लाख और एक सदस्य को नौकरी दिए जाने का फैसला किया गया।