आम जनता पर पुलिस के बर्बर रवैये को लेकर यूपी पुलिस सुधरने का नाम नहीं ले रही है।
ताजा मामला बहराइच जिले का है, जहां युवती के अपहरण मामले में गांव फत्तेपुरवा में एक ग्रामीण के घर दबिश देने गई यूपी पुलिस टीम ने 7 माह के बच्चे को पटककर मार डाला।
घर की महिलाओं को पीटते हुए उनके साथ अभद्रता की। एक महिला को पुलिस थाने भी पकड़ ले गई जिसका अब तक पता नहीं लग सका है।
नहीं सुधरी सुप्रीम कोर्ट में शर्मसार हो चुकी यूपी पुलिस
परिवार की महिलाओं ने शनिवार को एसपी को तहरीर सौंपी है। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी ने रामगांव थानाध्यक्ष को तलब किया है।
देर शाम तक मामले में रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी थी। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस ने मृत बच्चे का पोस्टमार्टम भी नहीं कराने दिया।
रामगांव थाना अंतर्गत फत्तेपुरवा गांव निवासी एक युवती का सप्ताह भर पूर्व अपहरण हुआ था। युवती के परिजनों ने गांव के ही ननकऊ यादव के परिवार के एक युवक पर अपहरण का आरोप लगाते हुए थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
उसी मामले में रामगांव थाने की पुलिस टीम शुक्रवार देर रात फत्तेपुरवा गांव पहुंची। ननकऊ की पत्नी सुशीला का आरोप है कि टीम के साथ गांव के ही तीन अन्य लोग भी थे।
सभी ने घर में घुसकर तोड़फोड़ करते हुए जमकर उत्पात मचाया। घर की महिलाओं के विरोध करने पर सिपाहियों ने सुशीला, उसकी बहू संगीता और सविता को मारा पीटा।
सविता की गोद से सात माह के बेटे मुन्ना को छीनकर एक सिपाही ने फर्श पर पटक दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
सुशीला का आरोप है कि रामगांव थाने की पुलिस ने मृत बच्चे के शव का पोस्टमार्टम भी नहीं कराने दिया, जिस पर देर शाम उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
एसपी विनय कुमार यादव ने बताया कि सुशीला की शिकायत पर रामगांव थानाध्यक्ष को तलब किया गया है। वह स्वयं मामले की जांच कर रहे हैं।
अगर रामगांव पुलिस जांच में दोषी मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। एसपी ने कहा कि जिस महिला को पुलिस टीम द्वारा लाने की बात कही जा रही है, उसके मंदबुद्धि होने का पता चला है।