गढ़ी राम एत्मादपुर की निवासी दिव्या सिकरवार बताती है कि पहली बार में मैंस क्लीयर नहीं कर सकी, तो दूसरी बार में दो नंबर से सलेक्शन रह गया। इसके बाद भी हिम्मत नहीं हारी। प्रदेश में टॉपर होने का विश्वास नहीं हो रहा है। गांव से शहर तक किसी लड़की का शिक्षा हासिल करना आसन नहीं होता है। दो बार सफलता न मिलने पर कोई दूसरी नौकरी करने की सोच रही थी लेकिन मां ने पीछे हटने से मना कर दिया।
उन्होंने सेंट जोंस डिग्री कॉलेज से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की शिक्षा हासिल की। उसके बाद यूपीपीसीएस की तैयारी शुरू की थी। ऑनलाइन परीक्षा की तैयारी की। परिवार में पिता राजपाल फौजी,दादी और दो छोटे भाई है। डिप्टी कलेक्टर बनने पर सरकार की योजनाओं का लाभ हर लाभकारी तक पहुंचाने का प्रयास करेगी। गांव की बेटी के डिप्टी कलेक्टर बनने पर हर कोई बधाई दे रहा है। पिता राजपाल भी बेटी की सफलता पर मिष्ठान का वितरण करने में लगे रहे।
बुलंदशहर की नम्रता सिंह ने भी टॉप 10 में जगह बनाई। नम्रता सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया है। 383 पदों के लिए हुई परीक्षा में 364 पदों पर अभ्यर्थियों को चयनित घोषित किया गया है।
बता दें कि सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा (पीसीएस) परीक्षा-2022 में बेटियों ने परचम लहराया है। आयोग की ओर से जारी किए गए अंतिम चयन परिणाम में आगरा की दिव्या सिकरवार ने टॉप किया। लखनऊ की प्रतीक्षा पांडेय को दूसरा और बुलंदशहर की नम्रता सिंह को तीसरा स्थान मिला है।
नेहरूगंज कालोनी में निवासी नम्रता सिंह ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धी पर परिवार में जश्न का माहौल है। आसपास के लोग देर रात तक घर पर बधाई देने के लिए पहुंचते रहे। वहीं परिजनों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न मनाया। नमृता ने कहा कि उनका सपना आइएएस बनने का है। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के परिणाम के बाद नम्रता सिंह ने प्रदेश में तीसरा स्थान पाया है।
मूलरूप से बुलंदशहर की रहने वाली हैं नम्रता
नम्रता मूलरूप से डिबाई तहसील के सतोही गांव की रहने वाली हैं। वर्तमान में वह अनूपशहर की नेहरूगंज कालोनी में रहती हैं। नमृता के पिता डा. सुरेश सिंह ग्राम्य विकास विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर इटावा जिले में तैनात हैं। वहीं नम्रता की मां प्रोफेसर चंद्रावती अनूपशहर के दुर्गा प्रसाद बलजीत सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय में रसान विज्ञान की विभागाध्यक्ष के पद पर तैनात हैं।
नम्रता तीन भाई बहनों में सबसे बड़ी हैं। दो छोटे भाई पढ़ाई कर रहे हैं। नम्रता ने अनूपशहर जेपी विद्या मंदिर से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई की है। उन्होंने 2015 में सीबीएसई 12वीं में जिला टॉप किया था। इसके बाद एनआईटी दिल्ली से 2019 में बीटेक किया। तभी से वह सिविल की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वह ऑनलाइन तैयारी की है। 2021 में वह यूपीएससी में इंटरव्यू तक पहुंची। उन्होंने बताया कि उनका सपना आइएएस बनने का है। यह उनका पहला पड़ाव है। सफलता का श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को दिया है।खेलों में है खास रूचि
नम्रता ने बताया कि वह प्रत्येक दिन सात से आठ घंटे पढ़ाई के लिए निकालती हैं। इसके अलावा वह नियमित खेल के लिए भी समय देती हैं। उन्होंने बताया कि हैंडबॉल और बैडमिंटन खेलना उनका शौक है। हैंडवाल में नेशनल स्कूल खेली हैं।
मन लगाकर करें पढ़ाई, असफलता से निराश न होंः नम्रता
नम्रता ने युवाओं को संदेश दिया है कि असफलताओं से कभी निराश नहीं होना चाहिए। यदि मन लगाकर पढ़ाई करें तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं है। पढ़ाई के साथ खेल भी जीवन के लिये आवश्यक हैं। क्योंकि खेल से शरीर और मन स्वस्थ्य रहता है। इसलिए पढ़ाई के साथ थोड़ा खेल पर भी ध्यान देना चाहिए।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने पीसीएस 2022 का अंतिम चयन परिणाम शुक्रवार देर शाम घोषित कर दिया। इसमें देहरादून की बेटी आकांक्षा गुप्ता ने भी टॉप टेन सूची में जगह बनाते हुए चौथी रैंक हासिल की। कंप्यूटर इंजीनियरिंग में स्नातक आकांक्षा पिछले छह सालों से सिविल सेवा की तैयारी कर रही थीं। पांचवें प्रयास में उन्हें यूपीपीएससी में सफलता मिली।
देहरादून के मोहल्ला मोहित नगर निवासी नरेंद्र गुप्ता टाइल्स के कारोबारी हैं। उनकी बेटी आकांक्षा बचपन से ही मेधावी रही। प्रारंभिक शिक्षा सेंट जूड स्कूल से करने के बाद उन्होंने बीटेक की पढ़ाई डीआईटी यूनिवर्सिटी से की। बीटेक करने के बाद उन्हें इंफोसिस में नौकरी करने का अवसर मिला, लेकिन नौकरी करने के बजाए उन्होंने अपनी मां सपना गुप्ता का सपना पूरा करने का निश्चय किया। उन्होंने घर पर रहकर सेल्फ स्टडी शुरू की।
सेल्फ स्टडी से पाया मुकाम
बगैर कोई कोचिंग और ट्यूशन लिए उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी। इससे पूर्व उन्होंने उत्तराखंड पीसीएस का मेंस क्वालीफाई किया, लेकिन इंटरव्यू में रह गईं। वहीं यूपीपीएससी में इंटरव्यू के करीब तक पहुंच कर रह गईं। इस बार मेहनत रंग लाई और इंटरव्यू में भी आकांक्षा को सफलता मिली। आकांक्षा ने बताया कि बचपन से उनका सपना सिविल सेवा में जाने का था, यह उनके माता-पिता के कारण पूरा हुआ है। बताया, उन्हें बतौर डिप्टी कलेक्टर नियुक्ति मिलेगी।
बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. कुमार गौरव ने पीसीएस परीक्षा की टॉप-10 रैंकिंग में पांचवां स्थान हासिल किया है। पुरुषों की रैकिंग में वह पहले स्थान पर हैं। इससे पहले वह नायब तहसीलदार और असिस्टेंट कमांडर सीआरपीएफ की परीक्षा भी पास कर चुके हैं। उनकी उपलब्धि पर परिवार के साथ ही जिले के शिक्षकों ने खुशी जताई है।
अंबेडकरनगर जिले के रामनगर ब्लॉक के गांव उमरी भवानी निवासी सेवानिवृत्त ग्राम विकास अधिकारी चंद्र प्रकाश द्विवेदी व गृहणी शकुंतला देवी के बेटे कुमार गौरव की प्रारंभिक शिक्षा गांव में हुई। इसके बाद इंदईपुर इंटर कॉलेज से इंटरमीडियट पास करने के बाद इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। फिर जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से परास्नातक परीक्षा पास की। दिल्ली यूनिवर्सिटी से डॉ. रत्ना के मार्गदर्शन में हिंदी साहित्य में पीएचडी करने वाले कुमार गौरव का चयन 2016 में सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडर के रूप में हो गया था।
पीएचडी करने के दौरान नौकरी को ठुकराने वाले कुमार का नायब तहसीलदार की परीक्षा में नाम आ गया। उनके ज्वाइन करने से पहले ही पीईएस का रिजल्ट आने पर बीएसए के रूप में शाहजहांपुर में तैनाती मिल गई। उन्होंने अपनी नियुक्ति के दौरान नवाचार के जरिये विद्यालयों का शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने की गति दी है। शुक्रवार शाम को बीएसए के पीसीएस में चयन होने की खबर के बाद परिवार के साथ जिले के शिक्षकों ने भी बधाई दी। उनकी पत्नी योगिता ओझा ने बीटेक किया है और वह एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं।
2016 की जॉब ठुकराने के बाद लगा था बेरोजगार रह जाएंगे
बीएसए कुमार गौरव की जिंदगी में कई मौके ऐसे आए, जब वह काफी मायूस हो गए। असिस्टेंट कमांडर की नौकरी पीएचडी के कारण छोड़ दी। उन्होंने बताया कि इसके बाद तीन साल तक मौका नहीं मिलने पर परेशान होते रहे। ऐसा लगा कि अब बेरोजगार रह जाएंगे। इसके बाद नौकरी से उनकी झोली भर गई। नायब तहसीलदार के बाद बीएसए बने और पीसीएस में पांचवां स्थान पाया। कुमार गौरव के अनुसार, वह पीसीएस की नौकरी को ज्वाइन करेंगे।
धैर्य और साहस व ईमानदारी का विकल्प नहीं होता है। राष्ट्रीय आंदोलन के नेता हों या बड़े आईकॉन हो, इन सभी का सर्वकालिक जवाब है कि मेहनत और ईमानदारी ही सफलता दिलाती है। कुमार गौरव, बीएसए
पीसीएस-2022 में टॉप टेन मेरिट में जगह बनाने वाली प्राजकता त्रिपाठी शुरू से ही मेधावी छात्रा रहीं हैं। इन दिनों वह भारत सरकार के गृह मंत्रालय में तैनात हैं और अब पीसीएस में आठवीं रैंक के साथ प्राजकता का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हो चुका है।
वैसे तो प्राजकता मूलत: पट्टी प्रतापगढ़ की रहने वाली हैं, लेकिन उनके पिता सुरेश चंद्र त्रिपाठी काफी पहले प्रयागराज आकर बस गए थे। सुरेश चंद्र त्रिपाठी सरकारी स्कूल में शिक्षक के पद से रिटायर हो चुके हैं और मां उर्मिला त्रिपाठी गृहणी हैं। प्राजकता के बाबा राजेश्वर सहायक त्रिपाठी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। प्राजकता ने पीसीएस परीक्षा में अपने तीसरे प्रयास में सफल हासिल की है।
यूपीपीसीएस में नौवीं रैंक हासिल करने वाली आगरा के मधु नगर की एश्वर्या दुबे ने कहा कि एनसीईआरटी की पुस्तकों से तैयारी में मदद मिली। सिविल सर्विसेज में जाना मेरा मकसद है, इसकी तैयारी कर रही हूं। यूपी पीसीएस में नौवीं रैंक मिलने पर अभी एसडीएम के पद पर चयन हुआ है।
पढ़ाई के लिए कम से कम 8 घंटे जरूर दें। जब तैयारी करें तो सोशल मीडिया पर समय बर्बाद न करें। पढ़ाई के लिए अपना लक्ष्य तय कर उसे पाने में जुट जाएं। इनके पिता हरेंद्र दुबे और मां रचना दुबे का कहना है कि बेटियों को मौका मिले तो वह भी मुकाम पा सकती हैं।
प्रदेश की टॉप टेन सूची में मनकापुर के हरनाटायर गांव निवासी संदीप कुमार तिवारी ने दसवां स्थान प्राप्त किया है। इनका चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ है। संदीप के पिता नलकूप चालक हैं।
संदीप कुमार तिवारी के पिता शिवकुमार तिवारी मनकापुर में नलकूप चालक हैं। जबकि मां गृहिणी हैं। संदीप ने फोन पर बातचीत में बताया कि साल 2006 में उन्होंने एपी इंटर कॉलेज मनकापुर से हाईस्कूल किया था। तत्कालीन प्रधानाचार्य डॉ. अवध शरण मिश्र को सफलता व मार्गदर्शन का श्रेय देते हुए संदीप ने कहा कि माता-पिता, गुरुजी व मोटीवेटर अमित सिंह के दिशा-निर्देशन में वह आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं।
कंप्यूटर साइंस में बीटेक संदीप ने सरस्वती विद्या मंदिर अयोध्या से इंटरमीडिएट पास किया। पीसीएस 2021 के परिणाम में वह असिस्टेंट कमिश्नर (सहकारिता) बने थे। ज्वाइनिंग प्रक्रिया चल रही थी। इसी बीच परिणाम आया और अब डिप्टी कलेक्टर बन गए। इनका वैकल्पिक विषय दर्शनशास्त्र था। संदीप ने दिल्ली में कोचिंग की। पिता शिवकुमार तिवारी ने बताया कि संदीप की मेहनत, बजरंगबली की कृपा और पूर्वजों के आशीर्वाद से बेटे को कामयाबी मिली है।