प्रभु यीशु के बलिदान की याद में चर्च के घंटे थमे थे। पूजा की वेदियां विरान थीं। मसीही गम में डूबे थे। मौका था गुड फ्राइडे का। काशी धर्म प्रांत के बिशप फादर यूजिन जोसेफ की अगुवाई में छावनी क्षेत्र स्थित महागिरजा में दोपहर में जब क्रूस यात्रा की झांकी निकली तो प्रभु यीशु पर की गई यातनाओं को देख वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं।
प्रभु यीशु के मृत्युदंड से उन्हें कब्र में दफन किए जाने के 14 पड़ावों का नाट्य टोलियों ने भावपूर्ण व मार्मिक मंचन किया। हर पड़ाव पर रोमी शासकों की यातना की झलक देख मसीहियों की आंखें भींगती गईं। यीशु के मां से मिलने, येरूसलम की महिलाओं के विलाप और लहुलूहान यीशु को क्रूस पर चढ़ाने जैसे प्रसंगों का सजीव चित्रण किया गया। प्रार्थना और क्रूस रास्ते का गान हुआ तो सभी ने क्रूस की उपासना कर बाइबिल का पाठ किया। पुरोहित फादर थाॅमस, फादर अगस्टीन केजे, फादर चंद्रकांत आदि रहे। इसी तरह लंका, मड़ौली, बरेका, शिवपुर, चांदमारी आदि चर्चों में भी प्रार्थना व क्रूस यात्रा की झांकी सजाई गई। वहीं, सीएनआई चर्चों में भी यीशु का बलिदान दिवस मनाया गया। लाल चर्च में प्रयागराज से आए बिशप जगधारी मसीह ने यीशु के सात वचनों की व्याख्या की। पादरी संजय दान ने प्रार्थना कराई।
वाराणसी के छावनी क्षेत्र स्थित महागिरजा में दोपहर में जब क्रूस यात्रा की झांकी निकली तो प्रभु यीशु पर की गई यातनाओं को देख वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। वहीं एक महिला भी थी जिसने घुटनों के बल चलकर क्रूस यात्रा की झांकी पूरी की। ये महिला पिछले कई सालों से क्रूस यात्रा घुटनों से चलकर पूरा करती है। महिला ने बताया कि ये प्रभु यीशु के प्रति उनकी श्रद्धा है। प्रभु यीशु ने इस दिन यातनाएं सही थीं इसलिए वो ऐसा करती हैं।
यह भी पढ़ें- सेल्फी पॉइंट बना IST: यहीं से तय होता है भारत का मानक समय, लंकेश्वर रावण ने यहीं से की थी ज्योतिष की गणना
लेंट डेज के शुरू होने से गुड फ्राइडे तक यानी 40 दिनों तक मसीही समाज ने प्रभु यीशु के दुखभोग का एहसास किया। उन्होंने अपने शौक से तौबा कर उपवास रखे। लाल चर्च के सुरेंद्र चरन ने बताया कि 40 दिनों तक लोग अपने खर्च की कटौती से बचे पैसे को चर्च में दान करते हैं। फादर फिलीप डेनिस ने बताया कि गुड फ्राइडे पर काशी धर्म प्रांत के चर्चों से दान की कुछ राशि येरूसलम भेजी जाती है।