एडीजी कानून व्यवस्था और जिलाधिकारी के पत्र लिखने के बावजूद कारागार प्रशासन ने पूर्वांचल में आतंक का पर्याय बने प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी को सुलतानपुर से तिहाड़ जेल नहीं भेजा।
जौनपुर और उसके समीपवर्ती जिलों के कुछ माननीयों ने मुन्ना बजरंगी के पक्ष में पैरवी कर अधिकारियों के मंसूबे पर पानी फेर दिया है। शासन के इस ढुलमुल रवैये से बदमाशों का मनोबल बढ़ता जा रहा है।
डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की हत्या के बाद अधिकारियों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि ऐसी परिस्थितियों में आखिर कानून व्यवस्था कैसे सुधरेगी।
मुन्ना बजरंगी को तिहाड़ जेल स्थानांतरित करने के लिए जिलाधिकारी प्रांजल यादव ने गत 14 जून को महानिदेशक कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं उत्तर प्रदेश को पत्र लिखा था।
पत्र में कहा गया कि सुलतानपुर जेल में बंद प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास समेत विभिन्न धाराओं में 20 से अधिक मुकदमे पूर्वांचल के अलावा विभिन्न प्रांतों में दर्ज हैं।
जेल से वह अपने गुर्गों के माध्यम से जमीन कब्जा और रंगदारी की वारदातों को अंजाम दे रहा है।
कानून व्यवस्था के लिहाज से उसका सुलतानपुर जेल में बने रहना जनहित में उचित नहीं है।
इससे करीब पखवारे भर पहले तत्कालीन एडीजी कानून व्यवस्था अरुण कुमार ने भी महानिदेशक कारागार और आईजी जोन वाराणसी को पत्र लिखकर कहा था कि मुन्ना बजंरगी को तिहाड़ जेल भेजने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।