पत्थर की मूर्ति तोड़ना इतना बड़ा अपराध नहीं है कि राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चले।
जी हां, कुछ ऐसी ही दलील देते हुए सरकार ने माया की मूर्ति तोड़ने के आरोपियों से मुकदमा वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार ने अभियोजन पक्ष से इस संबंध में विधिक राय मांगी है।
अधिकृत सूत्रों के मुताबिक, प्रमुख सचिव न्याय एवं विधि परामर्श को इस संबंध में छह अप्रैल को पत्र लिखकर आख्या मांगी है।
सरकार की तरफ से न्याय विभाग को भेजे गए पत्र में लिखा है कि क्यों न सामाजिक परिवर्तन स्थल में मूर्ति तोड़ने के आरोपियों से मुकदमा वापस ले लिया जाए।
एक पत्थर की मूर्ति तोड़ने पर किसी के खिलाफ राष्ट्रद्रोह जैसी गंभीर धारा में मुकदमा क्यों चलाया जाए। अभियोजन पक्ष की राय मिलने के बाद सरकार की तरफ से मुकदमा वापस लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल की जाएगी।
फ्लैश बैक
बताते चलें कि 12 जुलाई 2012 को गोमती नगर स्थित सामाजिक परिवर्तन स्थल (अंबेडकर पार्क) में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की मूर्ति को तोड़ दिया गया था।
पुलिस ने इसमें यूपी नवनिर्माण सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित अग्रवाल उर्फ अमित जानी, कासिम चौधरी और राजेंद्र प्रसाद चौधरी को आरोपी बनाया था। बाद में इसमें पवन शर्मा और शगुन त्यागी का नाम भी सामने आया था।