पुलिस की चलताऊ कार्यप्रणाली, सतही विवेचना का लाभ पाकर ऑनर किलिंग के सात आरोपी जेल की सलाखों से बाहर आने में कामयाब हो गए।
हाईकोर्ट ने बदायूं जिले के गुन्नौर थानाक्षेत्र में प्रेमी युगल को टुकड़ों में काटकर जला देने की घटना के सात अभियुक्तों की फांसी की सजा माफ कर दी है।
अभियुक्तों की अपील पर फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति अमर सरन और न्यायमूर्ति पंकज नकवी की खंडपीठ ने कहा कि ऑनर किलिंग जैसे मामलों में पुलिस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
लचर विवेचना के कारण ऐसे महत्वपूर्ण केस में साक्ष्य नष्ट हो जाते हैं जो अभियुक्त को सजा दिला सकते हैं। गुन्नौर थानाक्षेत्र में 22/23 मई 2006 को प्रेमी युगल दीनदयाल और अनीता की बर्बरता पूर्वक हत्या कर दी गई।
इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने 30 जुलाई 2012 को अनीता के पिता नत्थू चचेरे भाईयों राकेश, महाबीर, वीरेश, जयप्रकाश, पप्पू और गुलाब सिंह को फांसी की सजा सुनाई थी। सभी पर 25-25 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया।
निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अभियुक्तों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने फांसी की सजा पर रिफरेंस और अपील दोनों की एक साथ सुनवाई की।
खंडपीठ ने अपील पर विचारण करते हुए पाया कि अभियोजन ऑनर किलिंग का आरोप संदेह से रहित साबित कर पाने में नाकाम रहा है।