बदायूं के आम लोगों के साथ 'चाय पर चर्चा' के बाद 'अमर उजाला' का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' अब महिलाओं के बीच पहुंचा। यहां बड़ी संख्या में जुटी महिलाओं ने खुलकर बदायूं के चुनावी मुद्दों को लेकर बात की। सरकार के कामकाज और कमियों की चर्चा की। पढ़िए किसने क्या कहा?
बदायूं में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं? 'अमर उजाला' के चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' में जब इस विषय पर बीए की छात्रा राजकुमारी से सवाल पूछा गया तो उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। राजकुमारी की बात सुनकर मौके पर मौजूद सभी महिलाएं शांत हो गईं। राजकुमारी ने सामाजिक और सरकारी दावों की पोल खोल दी। कहा कि सब तरह की बंधने केवल लड़कियों पर ही लगाए जाते हैं। लड़कों को हर तरह की छूट दी जाती है। लड़कियां अगर 10 मिनट भी देर हो जाएं तो दस तरह के सवाल पूछे जाते हैं, लेकिन लड़कों के लिए ऐसा कुछ नहीं होता है। लड़कियां अपने मन से कहीं भी नहीं जा सकती हैं, लेकिन लड़कें कहीं भी जा सकते हैं।
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राजकुमार ने शहरी और ग्रामीण लड़कियों के बीच का अंतर भी बताया। कहा कि हो सकता है कि टाउन एरिया की लड़कियों को कुछ छूट मिलती हो, लेकिन ग्रामीण इलाकों में हालात बेहद खराब हैं। शाम होने के बाद लड़कियां अकेले घर से बाहर नहीं निकल सकती हैं। उनके साथ कुछ भी हो सकता है। ग्रामीण इलाकों में किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। गांव की लड़कियों के पास फोन भी नहीं होते हैं कि वो जरूरत पड़ने पर किसी को फोन कर सकें।
गिन्दो देवी महिला महाविद्यालय की प्रचार्या डॉ. वंदना शर्मा ने कहा कि महिलाओं और बेटियों के हालात में बदलाव के लिए घर से ही प्रयास करने होंगे। इसके बदलाव की बयार तो घर से ही आएगी। बेटियों को नहीं बेटों को समझाने की जरूरत है। महिलाओं को खुद के आत्मसम्मान के लिए लड़ाई लड़नी होगी।
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नगर पालिका अध्यक्ष ने किया बड़ा दावा
चुनावी चर्चा में महिलाओं के हालात पर बात करते हुए बीए की छात्रा राजकुमारी।
- फोटो : अमर उजाला
नगरपालिका की अध्यक्ष दीपमाला गोयल ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। कहा कि 2014 में मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से महिलाओं के लिए तमाम योजनाओं को लागू किया।
उज्जवला योजना के माध्यम से पूरे देश की महिलाओं को बड़ी राहत दी है। शौचालय की व्यवस्था कराई है। पहले महिलाएं शौच के लिए खेतों में जाती थी, आज घर-घर में शौचालय बन चुका है। दीपमाला गोयल ने कहा कि हर योजना का लाभ जरूरतमंदों को मिले इसके लिए भाजपा की महिला मोर्चा व अन्य कार्यकर्ता बूथ स्तर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने सड़कों पर गड्डों को लेकर बड़ा दावा किया। कहा कि अगले कुछ महीनों में सारे गड्डे भर दिए जाएंगे।
दीपमाला ने कहा कि महिलाएं पहले से ज्यादा अब सुरक्षित हैं। बेटियों को खुद के अधिकारों से परिचित होना पड़ेगा। सरकार और प्रशासन हर तरह से बेटियों की मदद करने के लिए तैयार है। पहले बेटियां रात में घर से नहीं निकल पाती थी, आज खुलकर कभी भी निकल सकती हैं। बेटियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
प्रो. सरला चक्रवर्ती ने कहा कि गांवों में महिला शिक्षा का स्तर काफी कम है। लड़का और लड़की का भेद अभी भी देखने को मिलता है। महिलाओं के साथ भेदभाव होता है। बच्चियों को पढ़ने के लिए स्कूल नहीं भेजा जाता है। ग्रामीण महिलाएं जागरूक नहीं है। महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी बड़ा है।
सरकारी योजनाएं गांवों तक नहीं पहुंच रही
डॉ. उमा सिंह ने कहा योजनाएं बहुत सी हैं, लेकिन उसका लाभ ग्रामीण महिलाओं को नहीं मिल रहा है। महिलाओं की शिक्षा भी बड़ा मुद्दा है। गांवों में 8वीं के बाद कुछ ही बच्चियां आगे पढ़ पाती हैं। बाकियों की शादी कर दी जाती है। किसानों को फसल का समर्थन मूल्य भी पूरा नहीं मिल पाया है।
बीए की छात्रा सुषमा ने कहा कि गांव की लड़कियों के लिए शिक्षा की व्यवस्था ठीक नहीं है। इसके चलते लड़कियां पढ़ नहीं पाती हैं। इसके लिए आर्थिक कमी बड़ा कारण है। जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक होती है, वो पढ़ लेती हैं लेकिन जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है वो नहीं पढ़ पाती हैं। सुषमा ने भी असुरक्षा का मुद्दा उठाया। कहा घर से बाहर निकलने में डर लगता है। बेखौफ का माहौल है।
मोनिका गंगवार ने कहा कि आज लड़कियां बेखौफ घूम सकती हैं। एक कंप्लेन पर अपराधी पर पुलिस की कार्रवाई होती है। पहले के मुकाबले हालात काफी बदले हैं।
डॉ. श्रद्धा यादव ने कहा कि बदायूं में आर्थिक संकट की कमी है। घर में भी अशिक्षा की कमी है। लड़कियों की शादी जल्दी हो जाती है। लड़कियां पैसों की कमी के चलते नहीं पढ़ पाती हैं। स्नातक स्तर पर छात्राओं की संख्या लगातार कम हो रही है। फीस माफ कर देनी चाहिए बच्चों की।
शिक्षिका सीमा यादव ने कहा कि सड़कों पर गड्डे हैं। बारिश में बुरे हालात हो जाते हैं। साफ-सफाई की व्यवस्था खराब है। बोलीं, शिक्षक समुदाय उन्हीं को वोट करेगा जो पुरानी पेंशन व्यवस्था फिर से लागू करवाएंगे। सीमा यादव ने महिला शिक्षकों के लिए दो दिन पीरियड लीव देने की मांग भी उठाई।
सरला ने कहा कि लड़का और लड़की का भेदभाव खत्म होना चाहिए। इसकी शुरूआत घर से ही होनी चाहिए। मीरा सिंह ने कहा कि सरकार ने सभी क्षेत्रों में बहुत अच्छा काम किया है। बेटियों को अपनी शक्ति की पहचान खुद करनी होगी।
सैनरा वैश्य ने कहा कि पहले के मुकाबले अभी काफी बेहतर फर्क महसूस होता है। हालांकि, ग्रामीण और शहरी इलाकों की रहने वाली महिलाओं के हालात में बहुत फर्क है। ग्रामीण इलाकों में थोड़ी सी दिक्कत है, लेकिन इसके लिए समाज को ही आगे आना होगा।