आम आदमी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में सरकार बनने पर 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा किया था। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने भी अब मुफ्त बिजली का वादा कर दिया है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने नए साल के पहले दिन इसका एलान किया। कहा कि अगर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो 300 यूनिट तक सभी को मुफ्त बिजली दी जाएगी। देखिए इस चुनावी वादे को पूरा करने में कितनी अड़चनें हैं?
उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद सूबे में बिजली की व्यवस्था काफी बेहतर हुई है। शहरी इलाकों में 24 घंटे बिजली की सप्लाई हो रही है। ग्रामीण इलाकों में 18 से 20 घंटे बिजली की आपूर्ति होती है। हालांकि, जब बात बिजली दरों की होती है तो हर कोई हाथ खड़े कर देता है। यही कारण है कि इस बार चुनाव में महंगी बिजली का मुद्दा काफी हावी है।
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पार्टियों ने किया मुफ्त बिजली का वादा
आम आदमी पार्टी ने सबसे पहले यूपी चुनाव के लिए 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा किया था। इसके बाद कांग्रेस और अब समाजवादी पार्टी ने भी मुफ्त बिजली का वादा कर दिया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने नए साल के पहले दिन इसका एलान किया। कहा कि अगर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो 300 यूनिट तक सभी को मुफ्त बिजली दी जाएगी। किसानों को भी सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली मिलेगी। अब सवाल उठता है कि क्या ये संभव है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में इस तरह के चुनावी वादे पूरे हो सकते हैं? यह भी जानना जरूरी है कि अभी बिजली विभाग की क्या स्थिति है?
अभी यूपी में प्रति यूनिट कितना बिल देना होता है?
ग्रामीण इलाकों में
यूनिट
चार्ज (रुपया)
0-100
3.35
101-150
3.85
151-300
05
500 से अधिक
06
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शहरी इलाकों में
यूनिट
चार्ज (रुपया)
0-150
5.5
151-300
6
301-500
6.5
500 से अधिक
7
घाटे में है बिजली विभाग?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश का विद्युत विभाग 90 हजार करोड़ रुपये के घाटे में है। प्रदेश के बिजली मंत्री श्रीकांत शर्मा खुद स्वीकार कर चुके हैं। ऐसा नहीं है कि ये घाटा इसी सरकार के कार्यकाल में हुआ है। पिछली सरकार में यानी जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे तब भी उत्तर प्रदेश का विद्युत विभाग 73 हजार करोड़ रुपये घाटे में था। बिजली मंत्री श्रीकांत शर्मा आरोप लगाते हैं कि अखिलेश की सरकार में लोगों को बिजली भी नहीं मिलती थी और विभाग घाटे में भी चल रहा था। आज घाटे में है, लेकिन सप्लाई व्यवस्था काफी बेहतर हो गई है। अब हर घर बिजली कनेक्शन पहुंचाया जा चुका है।
कब-कब बिजली की दरों में हुई बढ़ोतरी?
उत्तर प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन के मुताबिक, 2012 से 2017 के बीच बिजली दरों में 60.71% की बढ़ोतरी हुई थी। कॉरपोरेशन के आंकड़ों के अनुसार तब बिजली की सप्लाई भी शहरी इलाकों में अधिकतम 18 से 20 घंटे होती थी, जबकि ग्रामीण इलाकों में छह से 12 घंटे। 2017 से अब तक बिजली की दरों में 25% की बढ़ोतरी हो चुकी है। 2019 में आखिरी बार उत्तर प्रदेश सरकार ने 12 से 15 फीसदी बिजली महंगी हुई थी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022
- फोटो : अमर उजाला
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. मनोज शुक्ला कहते हैं, 'बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है। मौजूदा समय उत्पादन की क्षमता में भी बढ़ोतरी हुई है। इसका फायदा आम लोगों को मिल रहा है। अब गांव हो या शहर बिजली की सप्लाई काफी अच्छी हो गई है। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में पॉवर ग्रिड की क्षमता 16500 मेगावाट थी जबकि आज 25 हजार मेगावाट की पीक डिमांड को पूरा किया जा रहा है। मतलब 26 हजार मेगावार ग्रिड की क्षमता हो चुकी है। फरवरी 2022 तक ग्रिड की क्षमता 30 हजार मेगावाट हो जाएगी।'
प्रो. शुक्ला के मुताबिक, 'जिस तेजी से बिजली की सुविधाओं में बढ़ोतरी हुई है, उस तेजी से बिजली भुगतान में इजाफा नहीं हुआ है। यही कारण है कि विभाग लगातार घाटे में चल रहा है। खपत बढ़ने से बिजली उत्पादन में होने वाला खर्च भी बढ़ रहा है। कोयले के दाम में भी काफी इजाफा हो चुका है। इसके बावजूद बिजली की दरों में अभी कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इसका भी प्रदेश सरकार को नुकसान उठाना पड़ेगा।'
प्रो. मनोज शुक्ला के अनुसार, 'ऐसी स्थिति में जब विभाग घाटे में है और बिजली की दरों में भी बढ़ोतरी नहीं हो रही है तब मुफ्त बिजली की बात काफी हवा-हवाई लगती है। अगर 300 यूनिट बिजली मुफ्त की सुविधा उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में दी जाएगी तो इसका भारी बोझ यूपी सरकार को झेलना पड़ेगा। तब विभाग का जो घाटा अभी 90 हजार करोड़ रुपये है वह 20 लाख करोड़ से भी अधिक हो सकता है।'