कन्नौज में मुद्दे हैं, जनता उसी आधार पर वोट देगी ...
कन्नौज शहर की मुख्य सड़क पर कामकाजी अब्दुल रफीक, मो. आसिफ, आयशा, मो. मेहराज, मो. कलीम, और मशरूर अहमद कहते हैं, उन्हें सपा उम्मीदवार पर भरोसा है। एकाएक नए प्रत्याशी पर भरोसा नहीं कर सकते। भाजपा के राज में बेरोजगारी बढ़ी है। योगी द्वारा यह कह देना कि उन्होंने पक्का मकान और राशन दिया है, इससे काम नहीं चलता। कन्नौज में विकास के मुद्दे हैं। कुछ काम ही नहीं हुआ। सड़क के गड्ढे ही भर जाते तो भी काम मान लेते। कटरा के किसान मलखान सिंह कहते हैं, पूर्व आईपीएस पर भरोसा नहीं कर सकते। यह व्यक्ति राजनीति में घुसने आया है। काम नहीं करने आया है। उनके पिता भी पुलिस महानिदेशक रहे हैं। अरुण असीम बताएं कि उन्होंने क्या किया है।
सात सौ शहीद किसानों को नहीं भूलेंगे...
कन्नौज सदर (सुरक्षित) विधानसभा सीट के अंतर्गत आने वाले गांव कटरा निवासी बदन सिंह अपने खेत में आलू खुदवा रहे थे। कन्नौज का आलू देशभर में प्रसिद्ध है। जिस तरह से पश्चिम यूपी में गन्ने की पैदावार पर खासा जोर रहता है, वैसे ही कन्नौज इलाके में आलू की खेती होती है। खेत पर पहुंची अमर उजाला की टीम ने जब बदन सिंह का मन टटोला तो उनका दर्द छलक आया। बोले, खाद मिल नहीं रहा। यूरिया ब्लैक में मिल रहा है। तीन सौ की बोरी, चार सौ में मिल रही है। दाम भी तीन सौ रुपये क्विंटल मिल रहा है। किसान आंदोलन का चुनाव में कोई असर है, इस सवाल के जवाब में बदन सिंह ने कहा, सात सौ शहीद किसानों को कोई नहीं भूलेगा। चुनाव में यह बात किसान समझता है।
उन्नाव की बात भूल गए, हाथरस भूल गए क्या
आलू का दाम तीन रुपये किलो मिल रहा है। लोगों के घरों में यही आलू कई गुना कीमत पर पहुंचता है। चिप्स लगाने का कारखाना कहां है। भाजपा उम्मीदवार पर भरोसा नहीं है। उन्होंने यहां के लोगों को देखा तक नहीं है। वे अपना रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखें। योगी सुरक्षा की बात करते हैं। उन्नाव की बात भूल गए। हाथरस में रात में लड़की जला दी गई, वह गुंडागर्दी नहीं थी। डीजल कहां पहुंच गया है। आलू दस साल पहले वाले दाम पर बिक रहा है। आवारा पशु तो खेत खाली कर देते हैं। शिफ्ट वाइज ड्यूटी देते हैं। पैसे न होने के कारण मलखन सिंह के बेटे प्रांशु ने कहा, बहन की शादी थी और हम बीटेक करना चाह रहे थे, नहीं हो सका। अब आलू खोद रहे हैं। उनका इशारा शिक्षा और रोजगार को लेकर था। लोगों का कहना है कि सरकार ने आलू के लिए कुछ नहीं किया। भंडारण की समस्या है, कई बार आलू सड़क पर फेंकना पड़ता है। ट्रेन का रैक समय पर नहीं लगता।