प्रेमलता कटियार, नीलिमा कटियार की मां
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यह कहता है कल्याणपुर विधानसभा सीट का गणित
देश की आजादी के बाद कानपुर सूबा भी राजनीति का भी बड़ा केंद्र रहा है। कानपुर में लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी ने राज किया है। इसे कांग्रेस पार्टी का गढ़ भी कहा जाता था, लेकिन बदलते हालात के साथ कांग्रसियों के पैर कानपुर से उखड़ते चले गए। आज यूपी की राजनीति में कानपुर का अच्छा खासा दखल है। यहां दस विधानसभा सीटें हैं। 2017 में इनमें से सात पर भाजपा, दो पर सपा और एक पर कांग्रेस के प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी। इससे पहले 2012 में इन 10 में से पांच सीट पर सपा, चार पर भाजपा और एक पर
कांग्रेस का कब्जा था।
कानपुर की कल्याणपुर विधानसभा सीट पहले कांग्रेसियों का गढ़ रही। इसके बाद इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा। भाजपा की प्रेमलता कटियार लगातार चार विधायक रही हैं। कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक ओबीसी वोटर रहते हैं, लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव में एसपी के सतीश निगम से चार बार की विधायक रहीं प्रेमलता कटियार हार गई थीं। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रेमलता कटियार की बेटी ने नीलिमा कटियार ने जीत दर्ज थी। सतीश निगम इस बार फिर समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में हैं और मुख्य मुक़ाबला उनके और भाजपा की नीलिमा कटियार के बीच में है।