उत्तर प्रदेश के चुनावी अखाड़े में आज का दिन स्वास्थ्य सेवाओं के नाम रहा। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही उत्तर प्रदेश को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने का वादा किया। भाजपा की तरफ से स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने 16 मेडिकल कॉलेज शुरू कर दिए हैं तो 30 अन्य का निर्माण जारी है। उन्होंने सस्ती जैनरिक दवाओं को उपलब्ध कराने और रिकॉर्ड एमबीबीएस डॉक्टर तैयार करने की बात भी कही। वहीं कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी ने मोर्चा संभाला और चुनाव जीतने पर हर प्रदेश वासी को 10 लाख रुपये के मुफ्त इलाज का वायदा किया। सवाल यह है कि जनता अपने बेहतर इलाज के लिए किसके वादे पर भरोसा करेगी?
वहीं, कांग्रेस नेता ऋतु चौधरी ने भाजपा के दावों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि इसी कोरोना काल ने उत्तर प्रदेश की बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की कलई खोल दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि गंगा किनारे खुले में पड़ी हजारों लाशों की तस्वीर अभी लोगों के दिलोदिमाग से ओझल नहीं हुई है। लोग अपने बीमार प्रियजनों को लेकर भटकते रह रहे, लेकिन न तो वे उन्हें अस्पतालों में दाखिला दिला पाए, न ही उन्हें दवाइयां और ऑक्सीजन मिल पाई। उन्होंने कहा कि यदि इस व्यवस्था पर भी भाजपा गर्व करती है तो यह शर्मनाक और कोरोना काल में मरे लोगों की मौत का उपहास उड़ाने वाला है।
ऋतु चौधरी ने दावा किया कि कांग्रेस अपने वादों पर खरी उतरती रही है। कांग्रेस के दिए अधिकारों के ही कारण अब देश के सभी बच्चों को मुफ्त शिक्षा देना अनिवार्य हुआ है और हर गरीब को 100 दिनों का मनरेगा रोजगार देना सभी सरकारों की मजबूरी बन गया है। उन्होंने कहा कि इसी तरह कांग्रेस अपने वायदे पर खरी उतरेगी और राज्य में सत्ता में आने पर हर गरीब को 10 लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराएगी।
राजनीतिक विश्लेषक सुनील पांडेय ने कहा कि यदि यूपी की सत्ता के दो प्रबल दावेदार – भाजपा और कांग्रेस – लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के वायदे पर चर्चा कर रहे हैं तो हिंदी पट्टी की राजनीति के लिए यह सुखद समाचार है। जातिगत समीकरण और सांप्रदायिक राजनीति में उलझी रही यूपी-बिहार की राजनीति यदि इससे आगे बढ़कर शिक्षा और स्वास्थ्य पर बहस करे तो यह इस पट्टी के लोगों के हित में होगा।
उन्होंने कहा कि अभी ठीक-ठीक चुनावी शुरुआत भी नहीं हुई है, इसलिए अभी इस तरह के विमर्श किये जा रहे हैं, लेकिन जैसे-जैसे चुनावी सरगर्मियां बढ़ेगी, जातिगत समीकरणों और धार्मिक कार्ड भी खूब खेले जाएंगे। भाजपा, सपा और बसपा के प्रबुद्ध सम्मेलनों से इनकी शुरुआत भी हो चुकी है, लेकिन इसके बाद भी इन मुद्दों पर चर्चा का स्वागत किया जाना चाहिए। जनता में जागरूकता बढ़ने के साथ ही ये मुद्दे प्रमुख विषय बनेंगे और स्वस्थ लोकतंत्र के लिए वही क्षण सुखदायी होंगे।
वहीं, सिद्धार्थनगर की जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछली (समाजवादी पार्टी की) सरकार ने अपने पूरे कार्यकाल में केवल छह मेडिकल कॉलेज बनाये थे, जबकि योगी आदित्यनाथ सरकार 16 मेडिकल कॉलेज शुरू कर चुकी है और 30 अन्य मेडिकल कॉलेज का काम जारी है। इसके आलावा दो एम्स भी तैयार हो रहे हैं। पहले उत्तर प्रदेश में केवल 1900 के लगभग एमबीबीएस सीटें थीं तो अब यह दोगुनी से अधिक हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अब हर जगह सस्ती जनारिक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं जिससे लोगों के इलाज का खर्च घटा है।
इन अस्पतालों के निर्माण के साथ-साथ यहां भारी मात्रा में टेस्टिंग लैब्स, नर्स, पैरामेडीकल स्टाफ और अन्य क्षेत्रों में भारी संख्या में रोजगार के अवसरों का भी सृजन हुआ है। इलाज की व्यवस्था के साथ-साथ मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट्स के निर्माण भी जारी हैं जो किसी भी आपात समय में पूरे प्रदेश को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में सफल रहेंगे।