प्रदेश सरकार ने कचहरी धमाके के आरोपी खालिद मुजाहिद की हिरासत में मौत की सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश की है।
प्रमुख सचिव गृह आर एम श्रीवास्तव ने बताया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को इस बारे में चिट्ठी भेज दी गई है।
सीबीआई से खालिद की मौत और उसके परिजनों की ओर से आला पुलिस अफसरों व अन्य 37 पुलिसवालों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की जांच का अनुरोध किया गया है।
उन्होंने कहा कि खालिद के परिवार की ओर से ऐसी मांग के बाद सरकार ने यह फैसला किया है। इससे पहले सरकार ने प्रमुख सचिव गृह राकेश कुमार और एडीजी जावेद अख्तर की समिति को इस मामले की जांच सौंपी थी। इसके अलावा न्यायिक जांच के आदेश भी दिए गए थे।
इस बीच खालिद के चाचा जहीर आलम की ओर से बाराबंकी कोतवाली में पांच आला पुलिस अफसरों समेत कुल 42 लोगों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र और हत्या का मामला दर्ज कराया गया है।
खालिद के परिजन इन अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने को के बाद ही शव लेकर गृह जनपद जौनपुर के लिए रवाना हुए। इससे पहले पांच डॉक्टरों की टीम ने कैमरे की मौजूदगी में खालिद का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम टीम में खास तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय के दो डॉक्टर तैनात किए गए थे।
डॉक्टरों ने बिसरा सुरक्षित रख लिया है। शनिवार को फैजाबाद में अदालत से पेशी के बाद लखनऊ लौटने के दौरान बाराबंकी के पास खालिद मुजाहिद की तबियत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
खालिद उन चार आरोपियों में शामिल था जिन्हें 2007 में लखनऊ, फैजाबाद और गोरखपुर की कचहरी में हुए बम धमाके के बाद पकड़ा गया था। मोहम्मद तारिक कासमी, मोहम्मद सजादुर रहमान और मो अख्तर उर्फ तारिक के साथ ही खालिद को शनिवार को फैजाबाद की अदालत में पेश किया गया था।
सरकार की ओर से खालिद के ऊपर से मामला वापस लेने की कार्रवाई शुरू की गई थी। हालांकि सत्र अदालत ने सरकार ने यह अर्जी ठुकरा दी थी। इस बीच, शनिवार को यह हादसा हो गया।
आरोपी कासमी के बयान की सत्यता परखी जाएगी
गृह विभाग ने इस पूरे मामले पर लखनऊ, बाराबंकी व फैजाबाद जेल के अधिकारियों से भी घटना की रिपोर्ट मांगी है।
विभाग के सूत्रों के मुताबिक इससे यह तय किया जा सकेगा कि खालिद के स्वास्थ्य के बारे में उसके साथ मौजूद रहे आरोपी तारिक कासमी का बयान कितना सही है।
दरअसल तारिक ने अधिकारियों को बताया था कि खालिद ने लखनऊ जेल के डॉक्टरों से अपनी तबियत खराब होने की बात कही थी लेकिन डॉक्टरों ने उसकी शिकायत पर गौर नहीं किया। गृह विभाग की ओर से घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए अलर्ट भी जारी किया गया है।
इन अफसरों के खिलाफ दर्ज है मुकदमा
1. विक्रम सिंह, पूर्व डीजीपी
2. बृजलाल, तत्कालीन एडीजी कानून व्यवस्था
3. चिरंजीव नाथ सिन्हा, लखनऊ चौक के तत्कालीन क्षेत्राधिकारी
4. एस आनंद, तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक, एसटीएफ
5. मनोज कुमार झा, तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक व 37 अज्ञात पुलिसकर्मी